ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 25 December 2017
मतला
बे-वफ़ा दोस्त को ग़र दिल से भुलाया जाए,
बाद फिर उसके कोई ग़म न मनाया जाए....
26.12.2014...
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment