Tuesday, 26 December 2017

क़ता

दिल में सब्र-ओ-क़रार ..कम ही सही,
जज़्बा-ए-इख़्तियार ......कम ही सही,
उस पे दामन में तार .....कम ही सही,
गुल-ओ-चमन-ओ-बहार कम ही सही
शुक्र है फ़िक्र तेरे बिन तो हूँ,
ख़ूब है ख़ुद से मुत्मइन तो हूँ...
उर्मिला माधव...
27.12.2016

No comments:

Post a Comment