दिल में सब्र-ओ-क़रार ..कम ही सही, जज़्बा-ए-इख़्तियार ......कम ही सही, उस पे दामन में तार .....कम ही सही, गुल-ओ-चमन-ओ-बहार कम ही सही शुक्र है फ़िक्र तेरे बिन तो हूँ, ख़ूब है ख़ुद से मुत्मइन तो हूँ... उर्मिला माधव... 27.12.2016
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