वेदना के स्वर मुखर होने लगे सब, शून्य से थे क्यूँ प्रखर होने लगे अब ?? हम ह्रदय पाषाण वत...रखते रहे हैं, टूट कर गिरते शिख्रर होने लगे कब ?? उर्मिला माधव... ३०.१२.२०१३...
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