हमने तौले है पंख मुश्किल के, अपनी ग़ैरत कहीं न झांकी है, ज़िन्दगी भर के,ये ताजरिबे हैं मुफ़्त कोई धूल नहीं फांकी है... उर्मिला माधव.. 3.12.2016
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