ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 5 December 2017
शेर
मुझको तक़दीर ने कितना भी बदल डाला है,
पर मेरे ग़म का सफ़र फिर भी बहुत आला है,
उर्मिला माधव,
6.12.2016
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