हो कहीं भी तुम,हमारे साथ हो,
यूँ हमारी ज़ीस्त की सौगात हो,
ज़िन्दगी ये चाहती है तुमसे अब,
तुमको देखूं दिन हो चाहे रात हो,
वो तुम्हारा मुस्कुराना बज़्म में,
कौन नईं मर जाए जो ये बात हो,
एक दिन ऐसा भी आया चाहिए,
तुम रहो ऑ रात भर बरसात हो,
मावरा दिल दर्द से हो जायेगा,
हाथ में जिस दम तुम्हारा हाथ हो.....
उर्मिला माधव...
28.10.2014....
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