ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 10 October 2025
उम्मीद कम थी
ख़ाब आए जब कभी भी दीद कम थी,
आप आए जब कभी उम्मीद कम थी,
बरसरे महफ़िल कभी चर्चा बहुत था,
मुस्कुराए जब कभी तनक़ीद कम थी,
उर्मिला माधव
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment