ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 7 October 2025
धीरे धीरे
धीरे-धीरे हम जहां से हट गए,
ज़िन्दगी के इम्तिहां से हट गए,
जब हमें दरकार थीं तन्हाईयाँ,
बस हर इक तीरो कमां से हट गए,
उर्मिला माधव
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