ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 30 September 2025
जी नहीं लगता
कैसी भी बहारें हों अब जी नहीं लगता,
बेवजह नज़ारों में अब जी नहीं लगता,
कुछ रूह परीशाँ है,कुछ जिस्म परीशाँ,
पुरनूर सितारों में अब जी नहीं लगता..।।
उर्मिला माधव.....
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