ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 20 September 2025
ज़िंदगी कब कब रही है मोतबर
ज़िन्दगी कब-कब रही है मोअतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर
ये तो कूज़ागर की ही मर्ज़ी है बस,
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव
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