ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 5 September 2025
सोचता कौन है
सोचता कौन है अब,रब के लिए,
मरते रहते हैं सब लक़ब के लिए,
ख़ुद की ख़ाहिश में ग़र्क़ रहते हैं,
कौन जीता है आज सब के लिए...
उर्मिला माधव
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