ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 23 January 2020
गवाही हूँ
मैं ........सियह रात की गवाही हूँ,
ख़ुद बख़ुद उसकी आवा-जाही हूँ,
कुछ परिंदों के ....पंख बिखरे हुए,
ज़ेह्न-ए-गुलज़ार की .....तबाही हूँ
उर्मिला माधव..
23.1.2017
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