ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 5 January 2020
ज़रूरी हो गया
कुलबुलाता फिर रहा था गोकि इक ज़हरीला सांप,
आस्तीनें झाड़ना बेहद ज़रूरी हो गया.
उर्मिला माधव,
6.1.2018
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