ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 9 January 2020
झुका पाई हूँ
मिरे आक़ा तेरी दुनियावी रस्मों की क़सम,
मैं किसी तौर भी गरदन न झुका पाई हूँ..
उर्मिला माधव..
10.1.2017
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