Sunday, 8 March 2020

जज़्बात रोते हैं

किसीकी आँख रोती है,
 मेरे जज़्बात रोते हैं,
सुबह हो शाम हो शब हो,
 क़फ़न हम रखके सोते हैं ।....
उर्मिला माधव..
9.3.2013

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