यार ये क्या कि यूँ वक़्त ज़ाया करो,
तुम मुहब्बत भी थोड़ी कमाया करो,
पूरी दुनिया में फिरते हो.....मारे हुए,
चलते-फिरते इधर को भी आया करो
आओ बैठो ज़रा दिल की बातें करो,
आधे रस्ते से मत लौट जाया करो,
अपने लफ़्ज़ों में पैदा करो तो असर,
कहते-कहते न तुम भूल जाया करो,
कितनी पहचान रखते हो इंसान की
हर किसी को नहीं गम सुनाया करो
उर्मिला माधव...
9.3.2014..
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