ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 17 March 2020
बावरी
दामिनी दमकि केँ चमक मारै बावरी,
भीतर ह्रदय के ....कुरेदै सब घाव री,
अँखियाँ बहामें नीर,मनुआँ धरै न धीर,
नित्य प्रति थोड़ौ सो घटै बस चाव री...
उर्मिला माधव,
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