कहते हो ख़ुदा हाफ़िज़,मजमून जानते हो ?
वो है हफ़ीज़ सबका,क्या इतना मानते हो ?
कैसी ज़बाँदराज़ी आपस में कर रहे हो?
क्यूँ क़ारसाज़ की तुम तौहीन कर रहे हो ?
उसकी नवाज़िशों से हर ज़र्रा पुरअसर है ,
क्यूँ बेवजह ही दर-दर की ख़ाक छानते हो ??....Urmila Madhav........
29.3.2013
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