ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 14 March 2020
महे क़ामिल नहीं होता
कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है यहाँ साहिल नहीं होता.....
उर्मिला माधव
14.3.2017
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