ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 16 March 2020
मुहाज़िर
इक मुहाजिर कह रहा है, मुझको हाज़िर जान लो,
जिस्म, जां, एहसास सब कुछ मैंने हाज़िर कर दिया...
उर्मिला माधव
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