ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 21 March 2020
देहिया भोजपुरी क़ता
मेरी भाषा नहीं,गलतियां हो सकती हैं... _/\_
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हो गइल मसान..देहिया,
कान रहल सब सनेहिया,
सुगना....फरार हो गईल,
छोड़-तोड़...सबके नेहिया ….
उर्मिला माधव...
22.3.2014...
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