ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 6 March 2020
आदम ज़ात हूँ
मर्तबा इंसाँ है मेरा और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक क़िस्सा-ए-हालात हूँ
उर्मिला माधव
२२.१.२०१३
22.10.2014
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