ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 10 March 2020
सबब कुछ नहीं
लो उन्सियत न हमको ज़माने से अब रही,
ग़ैरों की जुस्तजू का सबब कुछ नहीं जनाब...
उर्मिला माधव...
11.3.2015
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