वो अयादत को जो आए क्या मेहरबानी हुई,
उनके क़दमों में झुकी जो मेरी पेशानी हुई,
यूं मुसलसल डूबती जाती थीं साँसें दम-ब-दम,
यक़-ब-यक़ देखा उन्हें तो हमको हैरानी हुई,
अपनी ना-उम्मीदगी से पूछते थे हम सवाल,
रहग़ुज़र वो भूल बैठे या कि नादानी हुई??......उर्मिला माधव..
अयादत----बीमार का हाल पूछना.
11.3.2013
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