ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 15 March 2020
क़ुर्बान ही हुए हैं
हम ज़िन्दगी पे अब तक क़ुर्बान ही हुए हैं,
बा-बस्तगी से दिल की हैरान ही हुए हैं!!
अपनी बुलन्दियों पे क़ायम है आज भी हम,
रुसवाइयों के कितने सामान भी हुए हैं.!
उर्मिला माधव..
16.3.2013
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