ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 8 March 2020
सकती हूँ मैं
एक शेर----
दर्द से भरपूर अपने लफ़्ज़ों की...तासीर से,
हर कलेजे में उतर कर पार जा सकती हूँ मैं....
उर्मिला माधव...
9.3.2014...
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