ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 7 March 2020
मगर क्या हो
बनाना तो हमें भी था यहां इक घर मगर क्या हो,
ज़मीं के हर मुहाने पर फ़क़त इक लाश रख्खी है
उर्मिला माधव
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