ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 3 February 2020
ज़ख़्म
ज़ख़्म गिनती में .....चार लगते थे,
ये भी दुनियां ही गिन सकी शायद...
उर्मिला माधव ..
4.2.2017
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