ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 16 February 2020
शबाब
अय मियाँ क्यूँ घिस रहे हो,बेवज्ह अपनी कलम,
शाइरी के वास्ते,दरकार है ......हुस्न-ओ-शबाब,
उर्मिला माधव
17.2.2017
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