ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 5 February 2020
अब तक
उसकी गुफ्तार है,काग़ज़ पै सियाही अब तक,
जिसने किरदार से हरगिज़ न निबाही अब तक,
चार लफ़्ज़ों में दिलासा जो दिया ग़म के तईं,
उसकी करता है फ़क़त क़र्ज़ उगाही अब तक....
उर्मिला माधव
5.२.2015
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