ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 23 February 2020
सुनाई देती है
क्यूँ इतनी गहराई.....दिखाई देती है,
क्यूँ साँसों की आवाज़ सुनाई देती है,
बस ऐसी सूरत ग़ैर मुक़म्मल होजाए,
जो इंसानो को रोज़.....जुदाई देती है...
उर्मिला माधव...
24.2.2014..
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