ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 8 September 2020
छोड़ना पड़ा
दिल अपना हमको ज़ोर-ओ-ज़बर तोड़ना पड़ा,
मुंह तुझसे हमको ...अहले नज़र, मोड़ना पड़ा
हर रोज़ मर रहे थे ......बहोत सोच -सोच कर,
चाहत को अपनी .वक़्त-ए-सफ़र छोड़ना पड़ा,
उर्मिला माधव..
8.9.2016
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