ओछी हरक़त भारी कर दई बिननें तौ,
अपनेई घर की थारी भर दई बिननें तौ,
जीभ ते बस ईमान दिखामें दुनियां कूँ,
मूड़न पे बेगारी धर दई बिननें तौ,
बीच गैल में पत्थर धर कें चल दीन्हे,
रस्तन कूँ लाचारी कर दई बिननें तौ,
अपनी आप बड़ाई कर कें नाच रहे,
बे-मतलब बीमारी कर दई बिननें तौ,
इक दूजे कौ ताज सम्हारें फिर रए ऐं,
सब दुनियां की ख्वारी कर दई बिननें तौ,
उर्मिला माधव
18.9.2019
No comments:
Post a Comment