Wednesday, 2 September 2020

ज़रिया बहुत है

तुम्हारा ख्व़ाब में आकर चले जाना 
सुकून -ए-दिल को ये ज़रिया बहुत है 
तुम अपनी चाहतों से नापलो चाहे,
मेरा दिल आज भी दरिया बहुत है,
उर्मिला माधव ...
3.9.2013

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