ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 28 April 2020
झिझोड़ा गया
कितने रंगों से दिल को झिंझोड़ा गया,
बिखरी साँसों को रह-रहके तोडा गया,
मेरी आदत यही थी तो होता भी क्या,
मुझसे लिखना-लिखाना न छोड़ा गया....
उर्मिला माधव...
28.4.2014..
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