Tuesday, 31 December 2019

सालाना

क्या नया साल है पथ्थर में बाल आ जाना,
उससे होती है मुलाक़ात,....मगर सालाना,
उर्मिला माधव...
1.1.2015...

सर्द मौसम है

नया साल मुबारक ...
सर्द शोले हैं,....सर्द मौसम है,
ज़िन्दगी चाहती बहुत कम है,
बस ये दुनियां हरी-भरी करदे,
कुल ज़माने का तू मोहतरम है...
उर्मिला माधव ...
1.1.2016

स्थितप्रज्ञ

एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,
1.1.2018

उड़ गए

एक क़'ता 
इश्क़  के जुमले सुने और आसमां में उड़ गए,
जिस जगह जाना नहीं था,वो ही रस्ता मुड़ गए...
दस्तरस से दिल गया, अच्छा बुरा सोचा नहीं,
अपनी दुनियाँ भूल कर जाने कहाँ पर जुड़ गए.
उर्मिला माधव...

पैरों पे चल के ही

पैरों पे चल कर ही दुनियां देखी है,
इक-इक ईंट गिनी है हमने राहों की,

चलते चलते मंज़िल भी आ जाती है,
चाहत फ़िर क्यूं होगी हमें पनाहों की,
उर्मिला माधव

Monday, 30 December 2019

जगाई आपने

मेरे दिल में आज ये नफ़रत जगाई .....आपने,
इस क़दर बेजा हर इक हरक़त दिखाई आपने,
मेरी हिम्मत तौलने को ...हर नफ़स तैयार सब,
इसलिए हर चंद हर ज़हमत उठाई ......आपने...
उर्मिला माधव...

Friday, 27 December 2019

किरदार

Guftaar bhi hum hi hain,kirdaar bhi hum hi hain,
ab kaun tai karega , ki kismen kya kami hai.......  Urmila Madhav....

ताबानी

ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी.....उर्मिला माधव.  <3 <3

याद कर

अगला पिछला हर रवैय्या याद कर,
बाद उसके कोई भी....फ़रियाद कर,
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aglaa pichhla her ravaiyaa yaad kar,
baad uske.......koii bhii fariyaad kar...
उर्मिला माधव...
२८.१२.२०१३...

मीलों के फ़ासले

मीलों के फासले हैं मगर ग़म नहीं मुझे,
मुझको तेरे बगैर भी जीना तो आ गया...
उर्मिला माधव....
28.12.2014...

तबीयत ही हट गई

इक वक़्त था के हमको ज़माना अज़ीज़ था,
अब हर किसी से अपनी तबीयत ही हट गई...
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Ik waqt thA ki hamko zamanA aziz thA,
Ab her kisise apni tabeeyat hii hut gaii..
उर्मिला माधव

बदहवास को

जो काफ़िये ऑ बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं किसी बदहवास को..
उर्मिला माधव

Thursday, 26 December 2019

मां का ख़त

अब आपको ज़मीन पर ....जन्नत दिखाएँगे,
हम अपनी माँ के हाथ का एक ख़त दिखाएंगे...
उर्मिला माधव....
27.12.2014..।

चाहती है

Mujh pe bas qabiz hua hi chahti hai,
ek shai ab silsila hii chahti hai,

main khari utrun abas ummid par,
wo mera hardam bura hi chahti hai,

main kade fikron se guzrun,raat din,
apne haq main bas duaa hii chahti hai,

main guzarti hun,hazaaron tanz se,
zakhhm dil ka wo chhua hi chahti hai,

maine bhi baazi rakhi us ziist par,
khelna jo bas juaa hii chahti hai...
#उर्मिलामाधव...
27.12.2015

बहुत हैं दोस्त

उम्र के फ़ासले बहुत हैं दोस्त,
पाँव में आबले बहुत हैं दोस्त,
ज़ब्त करना हमारी आदत है,
ग़ैर को थाम ले बहुत हैं दोस्त...
उर्मिला माधव

Wednesday, 25 December 2019

हमारी नगरिया

आ हमारी नगरिया तू देख बबुआ,
के पुलिस है जबरिया तू देख बबुआ,
ये ख़बर है, मदारी हैं, कुर्सी प सब ?
आहा जनता बंदरिया तू देख बबुआ,
उर्मिला माधव

ले
Ye hai Dilli nagariya too dekh babua,
yahan police hai jabariya too dekh babua,
baithe kursee pe madaari khabar kya tujhe?
yahan janta hai bandariya too dekh babuaa.. Urmila Madhav...

दुआ सलाम

दुआ सलाम, ग़ुलामी के रंग में हो अगर,
ये वो सज़ा है के मुझसे क़ुबूल होती नहीं....
उर्मिला माधव...
26.12.2016..

कार ए ज़िन्दगी

उम्र भर तन्हा उठाया है ये बार-ए-ज़िन्दगी,
इसके आगे भी तो ज़ाया है ये कार-ए-ज़िन्दगी

क़द हमारा

दरमियाना क़द हमारा, हम कहाँ होते खड़े,
दह्र में कब था ठिकाना, हम जहां होते बड़े,

कर देते

तेरे रुख़ पर निगाह कर देते,
हम भी हर चंद आह कर देते,
चूंकि खुशियां ऑ ग़म बराबर हैं
वरना हम वाह-वाह कर देते
उर्मिला माधव

Tuesday, 24 December 2019

जानते थे हम

किसीकी ख़ैर ख़्वाही से मुतासिर हम नहीं होते,
बताओ आज से पहले तुम्हें कब जानते थे हम ?
उर्मिला माधव

Kisiki khair khwahii se mutasir ham nahin hote,
Batao aaj se pahle, tumhen kab jaante the ham??
Urmila Madhav

Monday, 23 December 2019

चुप हो गए

दिल कभी ज़्यादः दुखा बस रो लिए, चुप होगये,
ग़म सुलग कर बुझ गये और हम धुंए में खो गए ...
उर्मिला माधव...
24.12.2014...

Sunday, 22 December 2019

परमात्मा के नाती हैं

एक मतला,एक शेर----

खाली कहिबे कूँ बस संगाती हैं,
एक दूजे ते लोग आंती हैं,

कौन ते बोलिबे कूँ जाऔगे,
सब तौ, परमात्मा के नाती हैं,
#उर्मिलामाधव,
23.12.2015

हमने

वो अपने ग़म को इशारों में कर रहे थे बयां,
मगर तमाम उम्र ही बुत बन के काट दी हमने..
उर्मिला माधव,
23.12.2017

Saturday, 21 December 2019

कद्रदानी

बे-इन्तेहा हुई है..........अपनी भी क़द्रदानी,
जितनी भी की है आपने काफ़ी है मेहरबानी,
कितना जियेंगे आखिर,..मरना तो है हमें भी ,
शिरक़त को आइयेग़ा....जब हो क़ुरानखानी...
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be-intehaa huyi hai apni bhi qadardaanii,
jitni bhii kii hai aapne kaafi hai meharbaanii,
kitnaa jiyenge aakhir marnaa to hai hamen bhi,
shirqat ko aaiyegaa jab ho quraankhaanii...
उर्मिला माधव...
२२.१२.२०१३...

Wednesday, 18 December 2019

बदल जाते हैं

हम तो जैसे भी हैं हर वक़्त वही रहते हैं,
फ़र्क़ इतना है महज़ लोग बदल जाते हैं,
उर्मिला माधव
मुसलसल राह था,मंज़िल नहीं था
वो मेरी ज़ीस्त का हासिल नहीं था

उसे जब टूट कर चाहा तो जाना,
वो मेरे इश्क़ के क़ाबिल नहीं था,

वो जिस पर क़त्ल का इल्जाम अब है,
पुराना दोस्त था क़ातिल नहीं था,

ग़ज़ब की भीड़ थी महफ़िल में लेकिन,
कोई भी रौनके महफ़िल नहीं था,

अंधेरी गार में सूरज उगाना,
शहर के वास्ते मुश्किल नहीं था,
प्रतिमा सिन्हा


किसीकी नहीं

दुनियां तो चारागर किसीकी नहीं,
मुझको परवाह पर किसीकी नहीं,
कितना अच्छा है तीरगी से रसूख,
ये चमक उम्र भर ...किसीकी नहीं...
उर्मिला माधव,
18.12.2016

आह करता है

इश्क़ ..सब को तबाह करता है,
जिसको हो जाए आह भरता है
दिल जो आपे में ही .नहीं रहता
मुस्कुराने की चाह .....करता है
उर्मिला माधव

देखभाल कर

तस्वीर इक चुनी थी बड़ी देख भाल कर,
फिर उम्र भर उसीको सजा कर रखे रहे...
इक जुस्तजू कहाँ से कहाँ ले गई फ़िज़ूल,
दुनियां की हर ख़बर को हटा कर अड़े रहे...
उर्मिला माधव

Monday, 16 December 2019

क्या मानी

हो गया कोई जुदा तो क्या मानी,
यूँ तो ....दुनियाँ भी छूट जाती है....
उर्मिला माधव...
17.12.2014..

देखा जाएगा

ठोकरों के बल पे मैंने सारी दुनियां नाप दी,
अब सुकूँ बाक़ी रहा सो वो भी देखा जाएगा..
उर्मिला माधव..
17.12.2016

Sunday, 15 December 2019

हर सम्त मैं

Mujhpe koii baadshahat kya karega,
Yun bhi paidal huun, chaloon her her sant mein

मुझपे कोई बादशाहत क्या करेगा,
यूँ भी हूँ, पैदल....चलूँ हर सम्त मैं,
उर्मिला माधव
16.12.2017

ख़राब नहीं

सिर्फ़ अपनों की बात करते हो,
दुनियां इतनी भी कुछ ख़राब नहीं..
उर्मिला माधव

Friday, 13 December 2019

समर्पण के लिए

बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए, 
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए, 
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर, 
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए. 
उर्मिला माधव....

Monday, 9 December 2019

सोते रहे

हम जुदाई में तुम्हारी रात भर रोते रहे,
हम रहे बेचैन और बस तुम वहाँ सोते रहे,
आँधियाँ ग़म की यहाँ पर रात भर चलती रहीं,
और हम आँसू से अपने दाग़-ए-दिल धोते रहे ।।   उर्मिला माधव..

ख़ास थी

तस्वीर तेरी दिल में मेरे खूब ख़ास थी,
तेरे चलन से मेरी तबीयत बिखर गयी 
उर्मिला माधव...
१०.१२.२०१३.
tasveer teri dil main mere khoob khaas thi,
tere chalan se meri tabeeyat bikhar gayee...
Urmila Madhav..
10.12.2013..

क़ता--- मुस्कुराने लगे

ग़म यूँ ही दुश्मनों को बताने लगे,
ये समझने में हमको ज़माने लगे,

हाल क्या है हमारा ये पूछा मगर, 
दर्द सुन करके वो मुस्कुराने लगे,
उर्मिला माधव....
10.12.2014....

हक़ीक़त नहीं है

किसीको किसी से मुहब्बत नहीं है,
दिखावा है प्यारे हक़ीक़त नहीं है,

बिना बात ख़ुद को न हलकान करना,
किसी भी मरासिम की क़ीमत नहीं है..

हमीं मुस्कुरा कर गले पड़ रहे थे,
जहां में किसी की ये आदत नहीं है..
उर्मिला माधव,
10.12.2017

Saturday, 7 December 2019

सह्ल हूँ

मैं मुब्तिला-ए-ग़म हूँ पर ना शिकस्ता दिल हूँ,
बिस्मिल भी हूँ सही है....हर गाम पाब दिल हूँ
कोई रहनुमां नहीं है....ना ही कोई हमक़दम है,
पर दिल में है बुलंदी.....और आदतन सहल हूँ...
उर्मिला माधव...
१३.१०.२०१३
पाब दिल ----गिरफ्तार

जमा ख़र्चे

ये ज़बानी सब जमा ख़र्चे अलग हैं,
ज़िंदगी मुझको हराने पर तुली है
उर्मिला माधव
8.12.2017

एहतराम कर न सके

मेरी नज़र का कोई एहतराम कर न सके,
अजब कमाल रहा एक काम कर न सके,

वक़ार मेरी मुहब्बत का पुर कुशादह है,
कमाल तुम हो के उठके सलाम कर न सके,
उर्मिला माधव..

Friday, 6 December 2019

राहत हो

नहीं चाहा कभी मैंने ......के मेरी बादशाहत हो,
तमन्ना सिर्फ इतनी थी के मेरे दिल को राहत हो, 

Nahi chaha kabhi maine ke meri baadshahat ho,
Tamanna sirf itni thi ke mere dil ko raahat ho.. (Urmila Madhav Didi).

भेजा है

बरसरे बज़्म लो उस ने सलाम भेजा है,
ये ख़बर है ही नहीं किसके नाम भेजा है....
उर्मिला माधव...
7.12.2016

Thursday, 5 December 2019

एहतराम करती हूँ

चल.......तेरा एहतराम करती हूँ
तेरी ख़ातिर.....ये काम करतो हूँ
दिल मेरी मिलकियत है, रहने दे,
कुल जहां......तेरे नाम करती हूँ....
उर्मिला माधव...
6.12.2014....

बदल डाला है

Mujhko taqdeer ne kitna bhi badal daalaa hai,
Par mire gham ka safar fir bhi bahot aalaa hai..

मुझको तक़दीर ने कितना भी बदल डाला है,
पर मेरे ग़म का सफ़र फिर भी बहुत आला है,
उर्मिला माधव,

Wednesday, 4 December 2019

दीवार सी

हमने दीवारें चुनी हैं......ज़िन्दगी के वास्ते,
एक दिन ये ज़िन्दगी,दीवार सी हो जाएगी,

Hamne deewaren chuni hain zindagi ke waaste,
Ek din ye zindagi,deewar si ho jaegi.
उर्मिला माधव

आ रही है

मुहब्बत को मीज़ान पर क्या रखोगे ?
ज़का से लक़ा तक तुली आ रही है,
उर्मिला माधव
5.12.2017
ज़का-बुद्धि
लक़ा-सूरत
मीज़ान-तराजू

Monday, 2 December 2019

अर्पण के लिए

बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए, 
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए, 
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर, 
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए. 
उर्मिला माधव....
3.12.2014...

मिटाना पड़ता है

हर इक चेहरा स्लेट से मिलता जुलता है,
लिख-लिख के हर बार मिटाना पड़ता है

Her ik chehra slate se milta-julta hai,
Likh-likh ke her baar mitaanaa pdta hai,
उर्मिला माधव

कर दिए

Jab talak thi zindagi,qabiz rahe duniyan ke log,
Maut ne aakar sabhi qisse baraabar kar diye..

जब तलक थी ज़िंदगी, क़ाबिज़ रहे दुनियां के लोग,
मौत ने आकर सभी .........हिस्से बराबर कर दिए...
उर्मिला माधव..

ख़ाब नहीं

आंखें मुंदूँ तो मुझको लगता है,
सिर्फ़ आंखें हैं, इनमें ख़ाब नहीं,
उर्मिला माधव

राबिता ही न हो

हर इक ग़ज़ल की कोई इंतेहा तो होती है,
ख़ुदा करे के तेरी कोई इन्तहा ही न हो,
ये तेरा सोज़े तरन्नुम है या कमाल कोई,
दुआ रहेगी तेरा ग़म से राबिता ही न हो...
उर्मिला माधव..
2.12.016

रोलता है

जिसको देखो आशिक़ी पर बोलता है,
काठ के डिब्बे में ..कंकड़ रोलता है,
उर्मिला माधव,
3.11.2017

Sunday, 1 December 2019

आज़माता ही रहे

कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
2.12.2016

Saturday, 30 November 2019

लगी हुई

अब्र-ए-बहार तुझको बरसना है किस जगह,
हर दश्त में है आग .........बराबर लगी हुई
उर्मिला माधव..

Friday, 29 November 2019

ज़िंदह रहती है

जब बेजा अल्फ़ाज़ बहुत चिल्लाते हैं,
मुझमें इक ख़ामोशी ज़िंदा रहती है
उर्मिला माधव
30.11.2017

आफ़ताब

ऐसे भी रंग लाता है अज़मत का आफताब,
पुरज़ोर है तबस्सुम,दिल ग़म से पाश-पाश ... 
#उर्मिलामाधव....
29.11.2015

नईं नईं

मुहब्बत है हमें तुमसे,.ज़रूरत ही नहीं,नईं-नईं,
छुड़ा लेंगे तुम्हें तुमसे,..ये सूरत ही नहीं,नईं-नईं,
हमारा दिल दुखाने  में, ...ज़.माने बीत सकते हैं,
ज़रा भी ज़र्क़ आ जाए,वो मूरत ही नहीं,नईं-नईं..
उर्मिला माधव,
29.11.2016

Thursday, 28 November 2019

रहने भी दो जाओ

तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ,
बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ,
कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ?
अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ..
उर्मिला माधव,
29th november

नज़्म छोटी सी

हमने अपनी धड़कनों को थाम कर, 
उससे थोड़ी ज़िन्दगी क्या मांग ली,
वो मगर कुछ भी न बोला देर तक,
और जब बोला तो बस इतना कहा,
आप हमसे इस क़दर क्यूं बोलते हैं.....
उर्मिला माधव

क़ाबिल हुए हैं

हम बड़ी मुश्किल से इस क़ाबिल हुए हैं,
अब कहीं जाकर बहुत मुश्किल हुए हैं,

क़द्र करते करते ही बदहाल थे हम,
इस जहां में बेसबब बिस्मिल हुए हैं

ग़म जहाँ भर के हुए यकजा तभी से,
क्या करें ज़ाहिर के अब बेदिल हुए हैं,
उर्मिला माधव
29.11.2018

Wednesday, 27 November 2019

तासीर क्या है

हमारी मुहब्बत की तासीर क्या है,
समझने में तुझको बहुत दिन लगेंगे,
उर्मिला माधव

Tuesday, 26 November 2019

हंसराज हंस

हम तो बिक जाते हैं उन अहले करम के हाथों,
करके अहसान भी जो नीची नज़र रखते हैं
हंस राज हंस

इंतज़ाम करते हैं

जिनका हम एहतराम करते हैं,
वो ही कुछ ऐसा काम करते हैं,
जीने-मरने पे ..बात जा पहुंचे,
दिल का वो इन्तज़ाम करते हैं.

Jinka ham ehtram karte hain,
Wo hii kuchh aisa kaam karte hain,
Jeene marne pe baat ja pahunche dil ka wo intazaam karte hain..
उर्मिला माधव

Monday, 25 November 2019

धूल करते हैं

हम जो रह-रहके भूल करते हैं,
अपनी इज्ज़त को धूल करते हैं,
इक नुमाइश ग़मों की होती हैं, 
ज़िन्दगी बस फ़िज़ूल करते हैं,
उर्मिला माधव...
२६.११.२०१३..

इफ़रात हुई

हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016

नहीं होती

पहले होती थी फ़िक़्र दुनियां की,
अब ...किसी बात की नहीं होती,
ज़िन्दगी ......जितनी है हमारी है,
दिन की ...या रात की नहीं होती...
उर्मिला माधव
26.11.2017

Thursday, 21 November 2019

पहाड़ों की सांसों की रफ़्तार

पहाड़ों की साँसों की.......रफ़्तार कहना,
तो बतलायेंगे हम......नदी का भी बहना,

ये सूरज निकलना......हवाओं का चलना,
दरख्तों पे शाखों का.......लहरा के हिलना,

ये झरनों के पानी का........नीचे फिसलना,
कि नदिया के पानी में हिल-मिलके चलना,

यकायक पहाड़ों का............लावा उगलना,
काली घटाओं का...............ऐसा मचलना,

यूँ छन-छनके.......अब्र-ए-बहारां निकलना,
बहुत खूब नदिया का.......चलना-उछलना,

कभी कुछ बिगड़ना......कभी कुछ संभलना,
हर इक रंग में है .............रफ़्तार मिलना......
उर्मिला माधव...
२३.९.२०१३

सुन तो ले

Sare mahfil hazaaron baat kahne waale sun to le,
Fajiihat ko sanbhalun ab ke ye lahaja sambhaalun main....
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सरे महफ़िल हज़ारों बात कहने वाले सुन तो ले,
फ़जीहत को संभालूं अब के ये लहज़ा संभालूं मैं.......
उर्मिला माधव....
22.11.2014...

बयां होती है

हिज्र का दिन है मगर रात अयां होती है,
जितनी वीरानी है सब आप बयां होती है,
उर्मिला माधव

Wednesday, 20 November 2019

दिल्लगी

Kyun hawa dete ho aakhir jangalon ki aag ko,
Jalane walon se kabhi bhi,dillagi achhii nahin..

क्यों हवा देते हो आख़िर जंगलों की आग को,
जलने वालों से कभी भी दिल्लगी अच्छी नहीं,
उर्मिला माधव,
21.11.2017

आबाद रखा

हमने इक दश्त को आबाद रखा,
हम किसी ...आसतां से डरते हैं.
उर्मिला माधव

Monday, 18 November 2019

तश्ना लब के घर

सड़कों पे रो रहे हो यहां ....आएगा भी कौन,
बरसात बन के जाओ किसी तश्ना लब के घर..
उर्मिला माधव,
19.11.2017

Saturday, 16 November 2019

थाती रे

जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,

तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016

आकर देख ना

मेरे साक़ी शोखिये रिन्दाना आकर देख ना,
बे-अदब हाथों में है पैमाना,आकर देख ना,....

रंग-ए-महफिल देखने के वास्ते ही आ ज़रा,
हर सलीकेमंद का चिल्लाना,आकर देख ना,

हर कोई मैकश का जामा ओढ़ कर झूमे यहाँ,
मुख़्तसर,गिरता हुआ दीवाना,आकर देखना, 

हर अदावत में अदाकारी की है बस इन्तेहा,
एक लम्हा ही सही पर आना,आकर देख ना,

शैख़ है या है बिरहमन,जानना मुश्किल हुआ,
कौन कितना होगया मस्ताना,आकर देखना,
उर्मिला माधव...
17.11.201...

गवाही में

तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव

रोज़ रख देना

ख़यालों की मशक़्क़त रोज़ करना,रोज़ रख देना,
हमेशा कोशिशें रखना, ज़हन ख़ाली न हो जाए...
उर्मिला माधव,

Friday, 15 November 2019

जाती हूँ मैं

जोश-ए-उल्फ़त में सू-ए-दिलबर चली जाती हूँ मैं,
कौन हूँ,क्या चाहती हूँ........कब ये बतलाती हूँ मैं,
बे-तवज्जो सा रवैय्या............बाखुदा महबूब का,
तोड़ता जाता है वो............और जोड़ती जाती हूँ मैं.....
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

भरना पड़ा

आज ख़मियाज़ा तेरी उल्फ़त का भी भरना पड़ा,
इस क़दर गुज़री,यक़ायक़ ज़ब्त भी करना पड़ा,
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

Thursday, 14 November 2019

थका जाता है

पाँव थकते तो अजब क्या था,नई बात न थी,
कितनी हैरत है यहां दिल ही थका जाता है..

Paanv thakte to ajab kya tha naii baat na thi,
Kitni hairat hai yahan,dil hi thaka jata hai..
उर्मिला माधव 
15.11.2017

ग़म किसीका

अजब तमाशा है आशिक़ी का,
नज़र किसीकी सनम किसीका,

ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में,
न कोई समझे है ग़म किसीका,
उर्मिला माधव

Wednesday, 13 November 2019

रह गए

तीर ऑ तलवार हो कर रह गए,
बे-वज्ह हथियार हो कर रह गए,

प्यार से दामन भरा हर शख़्स का,
और अदू हर बार हो कर रह गए,

जिसका जी चाहा वो कुछ भी कह गया,
इस क़दर बाज़ार होकर रह गए,

झूठ और सच का कहाँ हो फैसला,
धारे भी जब धार हो कर रह गए,

हम मुहब्बत से गले मिलते थे पर,
लोग ही हुशियार हो कर रह गए,

चंद खुशियां ढूंढते फिरते थे हम,
ग़म गले का हार हो कर रह गए..
उर्मिला माधव,
14.11.2017

Tuesday, 12 November 2019

दिये देखा किये

बैठ कर अपने दिए ....देखा किये,
हम दिवाली और पटाखा क्या करें ...
#उर्मिलामाधव...
13.11.2015..

कम नहीं कुछ

कारसाज़ी उसकी,उसका मौजिजः है,
ज़िन्दगी है ख़ैरियत से कम नहीं कुछ,

Karsazi uski ......uska maujizah hai ,
Zindagi hai khairiyat se,kam nahin kuchh..
उर्मिला माधव,
13.11.2017
मौजिज:--- चमत्कार

Saturday, 9 November 2019

सुर्ख़ी नहीं

आंख में काजल नहीं और मांग में सुर्ख़ी नहीं,
पर मुहब्बत का मुझे मालूम हर उसलूब है,

Aankh me kajal nahin or maang me surkhii nahiN,
Par muhabbat ka mujhe maaloom har usloob hai.
Urmila Madhav.

सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

है ही नहीं

तू मुसलमां है मुझे ये तो ख़बर है ही नहीं,
इतने हिस्सों में अगर है तो बशर है ही नहीं,

Tu musalmaaN hai mujhe ye to khabar hai hi nahiN,
Itne hissoN me agar hai to bashar hai hi nahiN.
Urmila Madhav

जंजीर

मुझको ये मालूम था, दुनियां टेढ़ी खीर,
उससे भी ऊपर हुई, पैरों की ज़ंजीर...
उर्मिला माधव..

Thursday, 7 November 2019

कर दिया क्या ?

इश्क़ ने उसको मुक़म्मल कर दिया क्या,
लोग उसको भूलते से जा रहे थे…..
उर्मिला माधव

Wednesday, 6 November 2019

क्या समझे

मुहब्बत की ज़ुबां समझे न धड़कन की ज़ुबां समझे,
अभी तक हम नहीं समझे,कि वो समझे तो क्या समझे.

Muhabbat ji zubaaN samjhe na dhadkan ki zubaaN samjhe,
Abhi tak ham nahin samjhe ki wo samjhe to kya samjhe.
Urmila Madhav

दोहा

ऐसे तो सब खैरियत,फिर भी हैं बद हाल,
कब से करते आ रहे,ग़म का इस्तक़बाल.....
उर्मिला माधव...
7.11.2016..

नहीं लगता

तबीयत हट गई सबसे,कोई अपना नहीं लगता,
हक़ीक़त रु-ब-रु ही है,कोई सपना नहीं लगता
उर्मिला माधव,
7.11.2017

Monday, 4 November 2019

फ़र्क़ क्या

तुम कभी आओ न आओ फ़र्क़ क्या,
उम्र भर तो दूर ही रहना लिखा है,
उर्मिला माधव,
5.11.2017

थका दीजो

ज़िन्दगी इस क़दर थका दीजो,
तेरे करने को कुछ न रह जाये 
उर्मिला माधव
5.11.2917

होश में आ जाइए

ज़रा ....होश में आ जाइये,
इनसान जी.. ..ये फितूर है,
वही तुम करो .तो अना हुई?
वही हम करें ...तो ग़ुरूर है?
उर्मिला माधव..

था हमें मालूम

था हमें मालूम.....कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था....इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फ़ातिहा हो जायेगा
उर्मिला माधव...

साल मुबारक

साल मुबारक हम यारों को कह भी देते,
एकतरफ़ा सी बात ख़ुशामद लगती थी...
उर्मिला माधव

जबीं झुकती नहीं

किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
अगर कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
4.11.2015

भंवर

कितने भंवर लपेटे,मुश्किल में हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
#उर्मिलामाधव...
4.11.2015

Saturday, 2 November 2019

पाबंदियां

वो हमें पाबंदियां समझा गए,
जो फ़क़ीरों से कभी वाकिफ़ न  थे, 
उर्मिला माधव

Thursday, 31 October 2019

लड़ा होगा

tumhaaraa gam mire gam se yaqiinan hii badaa hoga,
magar ye bhii to mumkin hai,koii khud se ladaa hogaa,....

तुम्हारा ग़म मिरे ग़म से यक़ीनन ही....बड़ा होगा,
मगर ये भी तो मुमकिन है कोई खुद से लड़ा होगा...!!
उर्मिला माधव...
1.11.2014...

रूठ जाने की

खबर जब नश्र करदी गई,मिरा दिल टूट जाने की,
अदा मैने भी करदी रस्म,आख़िर रूठ जाने की,
उर्मिला माधव...
1.11.2014...

बार बार

Seena hua fighar mera jism taar-taar,
Is waqt ne saza en mujhe dein hain baar-baar.

सींना हुआ फ़िगार मेरा जिस्म तार-तार,
इस वक़्त ने सज़ाएं मुझे,दीं हैं बार-बार,
उर्मिला माधव

समझना ही नहीं

हम भी समझ रहे हैं हर इक बात आपकी,
सच तो यही है हमको समझना ही बस नहीं..
उर्मिला माधव

आसतीं चढ़ाके

हम आसतीं चढ़ा के उन्हें देखते रहे,
सांपों के झुंड में जो कभी नाग नाथ थे,
उर्मिला माधव

Tuesday, 29 October 2019

कौन करे

दिल को दरकार जब दुआ भी नहीं,
फ़िक़्र फिर बद्दुआ की कौन करे...
उर्मिला माधव,

मुहाल बहुत

ज़िन्दगी तुझ में इतने ख़म निकले
तुझको जीना हुआ मुहाल बहुत
उर्मिला माधव

हयात रख लूँ

इंसाँ की ज़िन्दगी भी .......हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे .....आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,.....रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
3.7.2013

ग़ाम---क़दम
तौफ़ीक़---शक्ति
आब-ए-हयात--ज़िन्दगी का पानी--यानी ---अमृत
रहगुज़र--रास्ता
मुक़म्मल--अटल
आलिम---विद्वान..

दुर ए दिंदान की दुनिया

तस्वीरी शेर-----
jab gulon ke paas se guzre to ye dil kah uthaa,
bas dur-e-dindaan kii duniyaa hataa lo ik taraf....
----------------------------------------------------------------
जब गुलों के पास से गुज़रे तो ये दिल कह उठा,
अब दुर-ए-दिन्दान की दुनिया हटालो इक तरफ़....
उर्मिला माधव...
29.10 2014...

जाबिर

muhabbat kii raftaar......tham sii gaii hai,
zamaana hai jaabir kise gam bataanaa,
----------------------------------------------------
मुहब्बत की रफ़्तार थम सी गई है,
ज़माना है जाबिर,किसे गम बताना...
उर्मिला माधव...
29.10 2014..
जाबिर---- अत्याचारी

नाप ले

ये शेर ख़ुद को महान समझने वालों के लिए है...

दोस्ती में क़द बराबर हो तो चल,
वरना भैये, फ़िर तू रस्ता नाप ले  
उर्मिला माधव

Monday, 28 October 2019

दीवार भी है

जहां तक ये दुनियां नज़र आ रही है,
वहां तक ये चिलमन है,दीवार भी है,

मशक़्क़त की हिम्मत दिखाऊँ भी कैसे,
अजब जी की हालत है बीमार भी है..
उर्मिला माधव

सकते हैं

लोग अच्छे हैं .........तो ख़ामोश बने रहते हैं,
वरना कुछ लोग हक़ीक़त भी उगल सकते हैं,
उर्मिला माधव

आकर देख

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं......आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है..अंतर्दृष्टि जगा कर देख, 
जब साहस उत्तुंग हुआ तब...रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जाता है,अपना पाँव बढ़ाकर देख...
उर्मिला माधव...
28.10 2014...

Friday, 25 October 2019

ये नहीं हुआ

मेरा कभी नहीं था चलो मानती हूँ मैं,
पर मेरे बिन रहा वो कभी ये नहीं हुआ...
उर्मिला माधव...
26.10.2016

क्या करेगा

जो गुलामों की तलब रखता हो, वो,
क्या करेगा ....आदमी की ज़ात का...????
उर्मिला माधव..
26.10.2016

गुलाब दे देंगे

चाँद तारों के ख़्वाब देदेंगे...........जितने चाहो गुलाब देदेंगे,
इतनी गफ़लत में बस नहीं रहना,उम्र भर का हिसाब देदेंगे
उर्मिला माधव
Twitter

लड़ गए

हर इरादे दुश्मनों के हर तरह कम पड़ गए
जो मुक़ाबिल जैसे आया,आख़िरश हम  लड़ गए,

नहीं हो

हमें है ख़बर, तुम ग़ज़लगो नहीं हो,
मगर चांद पर नाम चिपका लिया है 
उर्मिला माधव
26.10.2017

Thursday, 24 October 2019

इंतज़ार करके

तंग आ चुके हैं,हम भी अब इंतज़ार करके,
मिलने को आ गए हैं सब दरकिनार करके,

Tang aa chuke thain ham bhi ab intzaar karke,
milne ko aa gaye hain,......sab darkinaar karke,

उर्मिला माधव...
23.10.2016

आए हैं लोग

Ahle Sukhan ki nashisht in Faridabad...
:)
एक तेरी तस्वीर ने बीमार करवाए हैं लोग,
क़ब्र से बाहर तेरे दीदार को आए हैं लोग..... :)
उर्मिला माधव...

दीवान है

ज़िन्दगी अपनी बहुत वीरान है,
दर्द से लिख्खा गया दीवान है,
रोज़ लिखते और मिटाते हैं इसे,
ग़ैर को हम कब दिखाते हैं इसे,
उर्मिला माधव

Monday, 21 October 2019

क्या होगा

अभी पहली ही दुनियां में ..क़दम रखना नहीं आया
तो फिर अब दूसरी दुनियां बना कर और क्या होगा ?

Abhi pahli hii duniyan me qadam rakhna nahin aayaa,
To phir ab dusri duniyan banaa kar or kya hoga ?

Urmila Madhav

चस्पां हैं

मेरे दिल में हज़ार तूफां हैं,
कुछ तरद्दू भी इसमें चस्पां हैं 
इक मशक्क़त है,ज़ब्त रखने में 
फिर भी महफूज़ चश्मे गिरयाँ हैं,

Mere dil me hazar tufaan hain,
Kuchh taraddu bhi ismen chaspaan hain,
Ik mashaqqat hai zabt rakhne me,
Phir bhi mahfooz chashme giryaan hain

Urmila Madhav

नहीं देखी

जिसको देखे से इश्क़ हो जाए,
ऐसी सूरत कहीं नहीं देखी,
उर्मिला माधव

शनासाई न थी

एक तो गहरी .........शनासाई न थी,
जो भी थी वो हमने  दिखलाई न थी,
हमने अपने दायरे ........कायम रखे,
हां मगर .......मंशा ये बतलाई न थी...
उर्मिला माधव
21.10.2017

ढोया किये

दिल ने एक दिन बाख़ुदा ईमान तौला आपका,
उम्र भर ..अफ़सुर्दगी का बार हम ढोया किये..
उर्मिला माधव...
::::
dil ne ek din bakhudaa ....iiman taula aapka,
Umr bhar afsurdagi ka baar ham dhoya kiye,....
Urmila Madhav
21.10.2017

Saturday, 19 October 2019

लौटे हैं

ज़ेहन और दिल हमेशा होश में रहना ज़रूरी है 
कभी गुम हो गए थे हम,बड़ी मुश्किल से लौटे हैं...
उर्मिला माधव
20.10.2015

आह न की

ज़ब्त की इंतेहा कहाँ होगी ?हमने मरते हुए भी आह न की 

उर्मिला माधव

अहमद फ़राज़

मिल गए ग़ालिब हज़ारों, और कुछ अहमद फ़राज़,
इक सह्ल किरदार मिलना, ख़ास मुश्किल हो गया...
उर्मिला माधव

ज़ीना था बस

हमने तुमको दिल में रख के बेशक़ीमत कर दिया,
वरना दीवारें थीं तुम थे ...और इक ज़ीना था बस,
उर्मिला माधव
19.10.2018

Wednesday, 16 October 2019

दिल का होता है

हजारों लफ्ज़ से बढ़कर इशारा दिल का होता है,
यही वो रंग है के जो दिल-ए-बिस्मिल का होता है...
उर्मिला माधव...
17.10.2014...

दैर ओ हरम

जो जहाँ की आख़री सीढ़ी से सबको देखते हैं,
उनपे फिर दैर-ओ-हरम क़ाबिज़ कहाँ हो पायेगा???
#उर्मिलामाधव
16.10.2015

मोअतबर तक ले गई

हॉस्पिटल में डॉक्टर्स के हाथों जो बच्चा मार दिया गया,उस बच्चे को समर्पित---
:::::
इक इबादत और अक़ीदत कैसे दर तक ले गई,
पुर यकीं थे दिल की चाहत,मोतबर तक ले गई,
क़त्ल गाहों की हिफाज़त कर रहे थे चारा ग़र,
ज़िंदगी जीने की हसरत ,मौत घर तक ले गई....
उर्मिला माधव...
17.10.2016
ik ibaadat or aqiidat,kaise dar tak le gaii,
pur yakiiN the dil ki chahat,motbar tak le gaii,
qatl gaahoN ki hifazat kar rahe the chaaraaghar,
zindagII jeene ki hasrat maut ghar tak le gaii...
Urmila Madhav...

Tuesday, 15 October 2019

मुस्कुराहट

सबसे पहले तो ..लबों की मुस्कराहट छीन ली,
आँख की बीनाई से ...हर जगमगाहट छीन ली,
उनकी दुनियां के न जाने मुशतरक कितने हुए,
उसपै ये इल्ज़ाम......हमने गुनगुनाहट छीन ली....
उर्मिला माधव...
16.10.2016

लब खुले रहे

शर्म-ओ-हया के नाम पे,आंखों को ढक लिया,
बोसे की ख़्वाहिशों में मगर ......लब खुले रहे..

Sharm-o-haya ke naam pe aankhon ko dhak liya,
Bose ki khwahishon me magar lab khule rahe..
उर्मिला माधव..
16.10.2017

हिज्र

रातें बहुत शुमार हुईं, ...........हिज्र की हुज़ूर,
अब दिनकी उलझनों का भला क्या जवाब हो
उर्मिला माधव
15.10.2018

Monday, 14 October 2019

प्यार समझना

तुम जीत भी जाओ तो उसे.....हार समझना,
बे-मौक़ा वाह-वाह को.........बेकार समझना,
शेर-ओ-सुखन के हुस्न को जीता न कोई भी,
तारीफ़ की आवाज़ों को...बस प्यार समझना,
उर्मिला माधव
15.10.2014...

Sunday, 13 October 2019

महबूब है

मैंने कब तुझसे कहा के ......तू मेरा महबूब है
सिर्फ़ इतना ही कहा ........तू देखने में ख़ूब है
जिसने सारी ज़िन्दगी. ...वीरानियों में काट दी
तू नहीं समझेगा उसका दिल महज़ मज्जूब है

Maine kab tujhse kaha ke tu mira mahboob hai,
Sirf itna hi kaha, tu dekhne me khoob hai,
Jisne saari zindagi viiraniyon me kaat dii,
Tu nahin samjhega uska dil mahaz majjuub hai..
उर्मिला माधव

Saturday, 12 October 2019

जाते कहीं

जी हमारा उठ चुका है,हम नहीं जाते कहीं,
गोकि ज़िद के बादशा हैं,ग़म नहीं खाते कहीं,
भीड़ से हट के चलें ये अपने दिल की बात है,
पर क़दम रफ़्तार में हैं थम नहीं जाते कहीं,
उर्मिला माधव,
13.10.2018

Thursday, 10 October 2019

उतारी होती

चढ़ते तूफ़ाँ में कभी ......क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं ......शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर .......बात तुम्हारी होती..

chadhte toofaan main kabhii qashtii utaarii hotii,
khoob tabiyat se wahin ......shaam guzaari hotii,
jo kahiin had se guzar jaataa agar joshe junoon,
ham fanaa hote magar .......baat tumhaarii hotii
Urmila Madhav
उर्मिला माधव....
11.10.2016

हस्सास होती है

शायराना शख़्सियत, ....हस्सास होती है बहुत,
उसकी सारी ज़िंदगी ही .....ख़ास होती है बहुत,
ये शरफ़ हासिल है उसको,ग़म कहे अल्फ़ाज़ में
जो भी है तक़लीफ़ दिल के पास होती है बहुत…

ShayranA shakhsiyat, hassas hoti hai bahut,
Uski saari zindagi hii, khaas hoti hai bahut,
Ye sharaf haasil hai usko,gham kahe alfaz me,
Jo bhi hai taqlif dil ke paas hoti hai bahut....
उर्मिला माधव
11.10.2018

Wednesday, 9 October 2019

नहीं था

mera ek bhi gam kabhi tera nahin tha,
too kisika tha magar mera nahin tha,
Urmila Madhav...
10.10.2013..

पैवन्द

ख़ुद लहू जब जम गया,पैवंद बनके ज़ख्म पै
क्यों रफ़ूगर की हमें हाज़त रहे,.....बतलाइये...
::
Khud lahoo jab jam gayaa,paivand banke zakhm pe,
Kyun rafoogar ki hamen .........haazat rahe batlaaiye
#उर्मिलामाधव
10.10.2015

ख़ुश्बू नहीं आती

एक शेर--उन्वान
ख़ुशबू..

वो जो ख़त तुमने भेजे थे कभी ख़ुश्बू से तर करके,
किसी भी ढंग से खोलूं,......मगर ख़ुश्बू नहीं आती..
::
Wo jo khat tumne bheje the kabhi khushbu se tar karke,
Kisi bhi dhang se kholun,magar khushbuu nahin aatii...
#उर्मिलामाधव
10.10.2015..

इतरा गया

सबसे पहली बात..........तूने आसमां देखा नहीं,
अपने क़द पे खुद-ब-खुद ही बे-सबब इतरा गया...
उर्मिला माधव...
10.10.2014..

सांप का घर नहीं होता

Milkiyat uskii,gair ka ghar hai
Saanp ka apna ghar nahin hota

मिल्कियत उसकी,ग़ैर का घर है,
सांप का अपना घर नहीं होता,

Urmila Madhav

नुमायां होगया

आपने अपनी हदों से गिरके जो कुछ कर दिया,
आपका ज़ह्र-ए-जेह्न खुल कर नुमायां हो गया..
उर्मिला माधव

शामिल हैं

हमारी ख़ास मुश्किल है, के हम दुश्मन नहीं बनते,
यहां पर दोस्तों की शक़्ल में दुश्मन ही शामिल हैं,
उर्मिला माधव

भागें

कुछ लोग हैं के अपना दर्ज़ा नहीं समझते,
ख़ुद ही चिपकने आएं, ख़ुद ही बिछड़ के भागें
उर्मिला माधव

उड़ते हुए देखा

ज़माने को समझने में हमें क्या देर लगनी थी,
जब हमने सादगी की ख़ाक को उड़ते हुए देखा..
उर्मिला माधव
10.10.2018

Tuesday, 8 October 2019

बोता रहा

हर कोई एक दूसरे को ..........लानतें देता रहा,
ऑ वतन की शान में ....कुछ गुरबतें बोता रहा,
उसकी बकरी मेरी घोड़ी,मेरी ज़्यादा,तेरी थोड़ी,
अपनी ग़ैरत से भी नीचे,गिर गया......रोता रहा...
उर्मिला माधव...
9.10.2015

पानी पानी होगया

आपकी पेशानी पर ये काकुलें बिखरी हुई,
माशाअल्लाह दिल बेचारा,पानी-पानी होगया,

Aapki peshani par ye kaaulej bikhri hui in,
Masha allah dil bechara pani-pani ho gaya

Urmila Madhav

टीप लेते हैं

😕😕😕😕😕😕😳

चोरों से .......दोस्ती नहीं करना,
सारे अशआर ........टीप लेते हैं,
एक भी लफ़्ज़ लिख नहीं सकते,
उस पे .महफ़िल में चीख लेते हैं
उर्मिला माधव

लत है

बस उसको याद करना,ये रोज़ की सी लत है,
बेकार कोशिशें हैं, क्या लत भी छूटती है ??
उर्मिला माधव
9.10.2018..

Sunday, 6 October 2019

आने लगी

लगता है माहौल बिगड़ा जा रहा है
क्योंकि अब कुछ नींद सी आने लगी
उर्मिला माधव,
6.10.2017

Saturday, 5 October 2019

तौफ़ीक़

ज़ीस्त को जब भी ऐसी ख़्वाहिश हो,
इतनी तौफ़ीक़ दे के मर जाएं
उर्मिला माधव

ज़माना है

ये जो गुज़रा हुआ ज़माना है,
ये ही क़ुदरत का ताना बाना है
उर्मिला माधव

Wednesday, 2 October 2019

Deewali mubarak ho

Happy deewali to all my friends 🙏🙏🥀🥀❤️❤️
Dosto, her khushi mubarak ho,
Dil nashin zindagi mubarak ho,
Ye diwalii to .........ek din kii hai,
Umr bhar..raushni mubarak ho.

Urmila Madhav

Tuesday, 1 October 2019

कौनसा है वो

न अब तक भी समझ पाए कभी हम इस हक़ीक़त को,
सियासतदां कोई अच्छा है तो फिर कौनसा है वो ?
उर्मिला माधव..
2.10.2016

आबले

Inspired...

मेरा दर्द पढ़ने वाले, इसी राह पे न चलना,
ये हक़ीक़तें समझना, मेरे आबले भी गिनना,
उर्मिला माधव
2.10.2018

Monday, 30 September 2019

नहीं रहती

Mujhko parwaah kyun nahin rahti
Labon pe aah kyun nahin rahti

Sabko hai fiqr deen-o-duniyan kii,
Mujhko lillah,kyun nahin rahti

Urmila Madhav

चला गया

बस उसके बाद फिर मैं कभी,सोई ही नहीं,
जब से वो पासबाँ वो सिपाही चला गया,
उर्मिला माधव

Saturday, 28 September 2019

कमाल करते हैं

शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां,
लोग खुल के कमाल करते हैं,
जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है,
उसका बस..इस्तेमाल करते हैं...
उर्मिला माधव,
29.9.2017

तुमसे दूर

आपकी सूरत हंसीं तो है .….ज़ुरूर,
उसके ऊपर सिर्फ़ लिख्खा है ग़ुरूर,
इसको पढ़के यूँ समझ लो, जानेमन,
जा चुके हैं उम्र भर को .....तुमसे दूर
उर्मिला माधव

Friday, 27 September 2019

मेहमां करते

दिल में अरमान रहा,यार को मेहमां करते,
फिर भी ख़ामोश रहे,उसको बताया भी नहीं,
उर्मिला माधव,
28.9.2017

जाते रहते हैं

चाहिए कोई भी …..नहीं हमको,
हमतो बस ..दिल लगाते रहते हैं
दिल को तन्हाइयों का ग़म न रहे,
यूँ ही महफ़िल  में जाते रहते हैं..
उर्मिला माधव,
28.9.2017

Wednesday, 25 September 2019

नहीं गया

Toota hua jo dil tha samhaala nahin gaya,
gum apni zindagi se....nikaala nahin gaya....
Urmila Madhav....
26.3.2013..

बीमार कर देंगे

nazar bharke jo dekhenge,tumhen beemar kar denge,
zara bhi lab na kholenge.......magar izhaar kar denge,
muhabbat ke abhi pahle sufhe ke tum baraq padh lo,
hamesha aakhiri dum pe tumhen hoshiyar kar denge...
Urmila Madhav...
26.9.2013

सुभीता है

यूँ बोले वो राम क़सम दिल प्यार से हमने जीता है,
झूठ पे चलने वालों को,ये कितना बड़ा सुभीता है,
हाथ में ली तस्बीह..लिया हरि नाम हज़ारों रंगों में,
शाम हुयी तो गम के आंसू.....मयखाने में पीता है,
ये कितना बड़ा सुभीता है...
उर्मिला माधव...
26.9.2014

शिकायत नहीं रही

duniyaan se aaj koi shikayat nahin rahi,
afsurdgi se dil ko....bagawat nahin rahi,

milna ho ya bichhadna,sabhi eksa lage,
hum pe masarrton ki inaayat nahin rahi,
Urmila Madhav

जानता न था

पैमाना मेरी उम्र का ...........वो नापता रहा,
जो ज़िन्दगी के ग़म की तपिश जानता न था..
उर्मिला माधव..
23.9.2017

Tuesday, 24 September 2019

फ़ासले

अजनबी अतराफ़ हैं,और ये मुक़म्मल फ़ासले,
कितना बढ़ता जाएगा,रुकजा ज़रा तो साँस ले,
शौक है मिटने का,मिटजा,तेरी अपनी ज़िंदगी,
पहले दिल पे हाथ रखले,फ़ैसला तब ख़ास ले..
उर्मिला माधव...
25.9.2013

अतराफ़---दिशाएँ..

सवालों पे गिरे

आँख से आंसू जो निकले,दिल के छालों पै गिरे,
देखने वालों ने समझा ........सिर्फ़ गालों पै गिरे,
होश कुछ आया तो देखा ...घर धुंएँ से भर गया,
ग़म तड़प कर रह गए,.और हम मलालों पै गिरे
उर्मिला माधव..
25.9.2015

वीरानियाँ

हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और ख़लवतें....
#उर्मिलामाधव..
25.9.2015...

रह गए

सब यहीे समझे ......के सोते रह गए,
हम मगर ......तकिये भिगोते रह गए,
दिल जिगर पै इतने ज़्यादः ज़ख्म थे,
ख़ून के धब्बे ही ..........धोते रह गए..
#उर्मिलामाधव
25.9.2015

क्या हो जी ?

हमने जाने क्या-क्या अपना खो दिया,तुम क्या हो जी ?
हमको भी अब खलवतें दरकार है .....तुम जाओ जी,..
उर्मिला माधव..
25.9.2016

Understand

I do understand people's professionalism since childhood but couldn't follow it...
Urmila Madhav

फ़रोज़ां

फ़रोज़ां कर रहे थे ज़िन्दगी को,खूँ जला के हम
मगर ........तुमसे कहाँ ये रौशनी देखी गई मेरी
उर्मिला माधव
23.9.2017

देर करदी

Ye samajhne men kitni der kardi,
Zindagi kude pe hamne dher kardi
ये समझने में कितनी देर कर दी,
ज़िंदगी कूड़े पे हमने ढेर कर दी,
उर्मिला माधव

गुज़रती है

अपनी मजबूरियां बहुत थीं मगर
किसको बतलाते क्या गुज़रती है,
अपनी जानिब से हँसके मिलते हैं,
बात कहते हैं पर बिखरती है
उर्मिला माधव

कहता है

कोई जब इन्क़लाब कहता है,
ख़ुद को ही लाजवाब कहता है,

लफ़्ज़ कहता है, ज़ह्र हो जैसे,
जी दुखा कर सबाब कहता है

उर्मिला माधव

Sunday, 22 September 2019

जीते हैं

अहले दिल शायरी में जीते हैं,
रंज खाते हैं .....अश्क़ पीते हैं.....
उर्मिला माधव...
23.9.2014...

Saturday, 21 September 2019

दुआ करो

जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो,
जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो,

जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ?
तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़ुरूर है जो भी होगे तुम वो हुआ करो।।..
उर्मिला माधव....

Friday, 20 September 2019

सकते

लोग फितरत से कभी बाज़ नहीं आ सकते,
सोज़ की तरहा कोई ..साज़ नहीं ला सकते ,
जो कभी खुद में कोई ख़ास मुक़म्मल न रहे,
टूटते दिल में वो .....आवाज़ नहीं ला सकते...
उर्मिलामाधव...
21.9.2015

फैसला लेकर

एक छोटा सा फैसला लेकर,
ख़ुदकुशी हमने मुल्तवी करदी,
सांस जब तक है,जीते जाना है
बस रजिस्टर में हाज़री भरदी..
उर्मिला माधव,
21.9.2017

चाक पर

ज़िन्दगी कब-कब रही है मोअतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर

ये तो कूज़ागर की मर्ज़ी है महज़
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव

जुगाड़ू

मज़ाहिया कविता..

मेरी कविताएं जग में ........दहाड़ू पिया,
शब्द लिख्खे,.…....उखाड़ू-पछाड़ू पिया,
कितनी मुश्किल से पहुंची हूँ मंचों तलक
लोग कहते हैं मुझको .......जुगाड़ू पिया..
उर्मिला माधव,
21.9.2017

पहचान

हमको रंगों की न कुछ पहचान  बाक़ी रह गई,
रंग-ए-रुख़सत देख कर जब आंख झपकी ही नहीं,
उर्मिला माधव,
21.9.2018

Aazmaanaa hai

अभी तुमसे बिछड़ कर सोचते हैं,क्या करें आख़िर,
बड़ी मुश्किल है,अपना सब्र हमको आज़माना है
उर्मिला माधव
18.9.2019

Thursday, 19 September 2019

बेईमान सब

बात करते हैं सियासत की.....यहाँ इन्सान सब,
अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,कितने हैं बेईमान सब,
सबकी बातों में सियासत,और घातों में सियासत,
बस अकेले वो हैं वाइज़........बाकी हैं नादान सब...
उर्मिला माधव...
१९.९.२०१३

Wednesday, 18 September 2019

छुट्टी

साहिबे आलम जी क्या छुट्टी पे हैं ?
हमतो समझे थे के बस कुट्टी पे हैं... :)
उर्मिला माधव...
19.9.2016

ठहर गई

मैं सोचती थी वो तो मेरी दस्तरस मे है
ग़ैरों में उसको देख के धड़कन ठहर गई...
19.9.2017

देते हैं

कौन पूछे किसीका हाल यहां,
सब तो अपनी दुहाई देते हैं,
खुलती है,जब भी आंख मुश्किल से
तंज़ गहरे सुनाई देते हैं...
उर्मिला माधव,
19.9.2017

Tuesday, 17 September 2019

ढक सकूँ

Mujhko kahan gurez kabhi khasta haal se
Ho tiirgii ka sath zaraa zakhm dhak sakun
:;
मुझको कहाँ गुरेज़ कभी ख़स्ता हाल से,
हो तीरगी का साथ,ज़रा ज़ख्म ढक सकूँ..
#उर्मिलामाधव
18.9.2015

ज़ाया करोगे

ज़िन्दगी भी .अब मुसलसल पूछती है,
और कितना मुझको तुम ज़ाया करोगे...?
उर्मिला माधव..
18.9.2016

लग रही है

हर सतह अब ...खुरदुरी सी लग रही है,
सच समझ कर .झुरझुरी सी लग रही है,
अब धसक जाने का डर है ज़िन्दगी को,
ख़ास मिट्टी ......भुरभुरी सी लग रही है....
उर्मिला माधव...
18.9.2017

देखो

मेरी शाहाना शख़्सियत देखो,
हूँ मुक़ाबिल ...कई हुजूमों के...
उर्मिला माधव ...
18.9.2016

Monday, 16 September 2019

डरते ही बने

ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि....सिर्फ़ डरते ही बने
उर्मिला माधव..
11.3.2013

मुस्कुराया है बहुत

वक़्त ने .जब-जब सताया है बहुत,
रंज-ओ-ग़म चेहरे पे आया है बहुत,
दी मुआफ़ी हर किसी गुस्ताख़ को,
जब वो मुझ पे मुस्कुराया है बहुत..
उर्मिला माधव...
17.9.2016

एक हैं

ख़ाकसारी और बिमारी, दोनों बिल्कुल एक हैं,
दोनों ही हालात में तो ख़ुश्क हो जाते हैं लब,
उर्मिला माधव,
17.9.2018

Sunday, 15 September 2019

ठीक है

दूर घर से हो गए तो हो गए ख़ाना बदोश,
सिर्फ़ इतना सोचते हैं, जो भी है सब ठीक है
उर्मिला माधव

Saturday, 14 September 2019

लोग

इक तबस्सुम के लिए क्या-क्या नहीं करते हैं लोग,
अश्क़ उसके देख कर ..दिल देर तक रोया किया...
::
Ik tabassum ke liye kya-kya nahi karte hain log,
ashq uske dekh kar ..........dil der tak roya kiya
#उर्मिलामाधव
15.9.2015

नहीं है

जो हंस के मिल रहे हैं उन्हें प्यार नहीं है,
कोई भी उलझनों का ख़रीदार नहीं है..
उर्मिला माधव

इंतज़ाम करते हैं

जिनका हम एहतराम करते हैं,
वो ही कुछ ऐसा काम करते हैं,
जीने-मरने पे बात जा पहुंचे,
दिल का वो इंतज़ाम करते हैं...
उर्मिला माधव..

किसने दिया

आग में ज़िंदा जले, तब आपने सीता कहा,
आपको ये फैसला करने का हक़ किसने दिया ?
🤔
उर्मिला माधव,

छोड़ दिया

ख़ुद को बिल्कुल उदास छोड़ दिया,
दिल भी उसके ही पास छोड़ दिया,
अब शिकायत भी उससे कौन करे,
जिस ने उल्फ़त का पास छोड़ दिया...
उर्मिला माधव,
14.9.2018

Friday, 13 September 2019

इंडिया एक दिन

अगर मर्सिया लफ्ज़ मैच न होता हो तो,एक दिन के लिए ऐडजस्ट करलें बस..

आज हिंदुस्तान है ये, बाक़ी दिन फिर इंडिया,
तुमको हिंदी की कसम है,हिंदी बोलो हे पिया,
एक दिन की बात है बस,फिर वही अंग्रेज़ हम,
कल से पढ़ डालेंगे दोनों,इसपे मिलके मर्सिया..
उर्मिला माधव,
14.9.2017

Thursday, 12 September 2019

दौड़ कर आते

जुबां शीरीं जो तुम रखते तो हम भी दौड़ कर आते,
कोई मुश्किल खड़ी रहती,सभी कुछ छोड़ कर आते,
मगर बोली तुम्हारी......तल्खियत से चूर रहती है,
बताओ किसकी खातिर रस्म सारी तोड़ कर आते??
उर्मिला माधव ...
१३.९.२०१३

ईद मुबारक

दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो उसे वो दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो की गई है दिल से वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......use wo deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo kii gaii hai dil se.......wo tanqiid mubaaraq...
उर्मिला माधव....

कितनी बड़ी है

अभी इतिहास के पिछले सुफहे पूरे नहीं भूले,
नई एक इब्तेदा की आज फिर पहली कड़ी है,
ज़रूरत क्या कसौटी पर अकेले हम खरे उतरें,
करें क्यों मश्क आखिर ज़िन्दगी कितनी बड़ी है ?
उर्मिला माधव,
13.9.2016

दूर तक चली

तक़लीफ़ ज़िंदगी में बहुत दूर तक चली,
खुशियों ने डर के हमसे मुलाक़ात ही न की..
उर्मिला माधव,
13.9.2017

Wednesday, 11 September 2019

अंतर्धान

हम शिव कहकर शव हुए और तुम अंतर्ध्यान,
घर बाहर सब एकसा ...मन जब हुआ मसान....
#उर्मिलामाधव
12.9.2015

न हुई

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

संवार सकती थी

मैंने तनहाई को चुना है ख़ुद,
मैं भी दुनिया संवार सकती थी..

जाने कितने दबाव थे मुझपे,
चाहती तो मैं हार सकती थी,
उर्मिला माधव,
12.9.2018

Tuesday, 10 September 2019

क्या है

दिल,जिगर,दामन,गरेबाँ,चाक सब,
अब समझना है हमें ये चैन क्या है ?
::::::;;
Dil,jigar,daaman,garebaa'N chaak sab,
Ab samajhna hai hamen ye chain kya hai ?
उर्मिला माधव...
11.9.2016

आलमपनाह

मेरे जितने दोस्त थे सब हो गए आलमपनाह,
अब रिआया हैं न उनके दोस्तों में ही शुमार,
उर्मिला माधव,
11.9.2017

सन्नाटा है

चंडूख़ाने की दीवार गिरानी पड़ सकती है,
दीवारों के पार अजब सा। ....सन्नाटा है...
उर्मिला माधव,
11.9.2017

फिरता है

कितने सारे। ...दर्द समेटे फिरता है,
दिल ये आहें। ..सर्द समेटे फिरता है,
जब चाहे तब दुनियां अपनी रच डाले
बेमतलब की। ..गर्द समेटे फिरता है
उर्मिला माधव

क्यों आते हो

दुनियां से नाराज़ नज़र क्यों आते हो ?
झगड़े का आग़ाज़ नज़र क्यों आते हो ?
सब खुशियां तो हासिल तुमको रहती हैं,
बे मतलब नासाज़ नज़र क्यों आते हो ?
उर्मिला माधव।।

बेख़ुदी

ये मुक़म्मल बेख़ुदी और दिल भी ज़िद पर आ गया,
इतना भी मजबूर मत रख ...हाशिये महफ़िल मुझे....
#उर्मिलामाधव...
10.9.2015...

रेत के रास्ते

रेत के रास्ते हैं
रह-रह के बिखर जाते हैं,
फिर भी चलना तो पड़ेगा,
कोई उद्देश्य लेकर क्या चलूँ मैं,
ये बताओ क्या करूँ चलना छोड़ दूँ?
अनवरत है यत्न मेरा दूर जाने के लिए
मेरी रातें थक गईं है,याद करके
चैन अब मिलता नहीं कोई बात करके
आत्म केंद्रित होकर जीना ठीक होगा
मैं किसी पीड़ा को सहलूं
मुझमें वो ताक़त नहीं
जो समय ने पीर दी है
बाँध के छज्जे पै रख दी,
तुम ज़रूरत थे मेरी,पर मुझे चलना पड़ा है
साथ ख़ुद के
क्या तुम्हें लगता है
ये परस्पर दूरियां मिट पाएंगी अब?
शायद मेरी तरफ से तो नही
अब ज़रूरत थी निरंतर साथ की
कौन समझाता तुम्हें
जो तुम्हें करना नहीं था
कर रहे हो
जाओ तुम आज़ाद हो
बस यहीं तक रास्ते मिलते थे अपने,
मुझको लौटाना तुम्हारा काम था,
क्या कहूँ पर
ये समझने में मुझे सदियाँ लगी हैं
तुम ज़माने के लिए हो,लौट जाओ..
सबके पाने के लिए हो लौट जाओ
दिल दुखाने के लिए हो लौट जाओ
हाँ मैं कहती हूँ तुम्हें तुम लौट जाओ
यूँ भी तो अब मैं नहीं आउंगी तुम तक
लौट जाओ लौट जाओ लौट जाओ...
#उर्मिलामाधव
10.9.2015

Monday, 9 September 2019

सकते हैं

हम एक शख़्स को कितना, पुकार सकते हैं,
कभी ये सोच लो के हम भी हार सकते हैं,
उर्मिला माधव

रहने दे

दर्द को आस-पास रहने दे,
मुझको थोड़ा तो ख़ास रहने दे,
जो भी देना है ज़ख्म पूरा दे
वरना आधा लिबास रहने दे!!
उर्मिला माधव ...
9.9.2013

Sunday, 8 September 2019

तक़दीर का हम

क्यूँ करें शिकवा तेरी तहरीर का हम,
जानते हैं फैसला तकदीर का हम ...
सांप हमने पाल् के रख्खे है घर में,
जानते हैं हौसला हर तीर का हम ....
उर्मिला माधव
९.९.२०१३

आइंदा नहीं

उम्र से ज़्यादः कोई जिंदा नहीं,
चार पल है सिर्फ़,आइन्दा नहीं,
बेहयाई ओढ़ के बैठा हुआ जो,
गलतियां करके भी शर्मिंदा नहीं....
उर्मिला माधव...
9.9.2014...

क़ब्र लगता है

सब ज़माना ये क़ब्र लगता है,
चूँकि जीना ही जब्र लगता है,
ख़ुद को इंसान भी जताने में,
उम्र लगती है...सब्र लगता है,
#उर्मिलामाधव..
9.9.2015

Friday, 6 September 2019

बार ए मुहब्बत

क्या ही बेहतर हो उतारें,दिल से अब बार-ए-मुहब्बत,
कब तलक सजदा करें यूँ तुझको हम दार-ए-मुहब्बत..
उर्मिला माधव..
7.9.2016

रख देते हैं

सब लोग बहुत कुछ कहते हैं हम फ़ेक हंसी हंस देते हैं,
ढकने को अपने अश्क़ दुपट्टा आरिज़ पे रख देते हैं,
उर्मिला माधव,
7.9.2017

सोए नहीं हैं

जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है,"राम कसम" हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थितप्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सौंपे....अपने हाथों बोये नहीं हैं.
उर्मिला माधव..

Thursday, 5 September 2019

साबित हो मियां

एक तबक़ा जो मुहब्बत क़ौम पर ख़ारिज़ करे,
इस तरह से बे-गुनाही कैसे साबित हो मियाँ 
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ek tabqaa jo muhabbat qaum par khaariz kare,
iss tarah se be- gunaahii kaun phir saabit kare...
उर्मिला माधव....