ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 9 December 2019
सोते रहे
हम जुदाई में तुम्हारी रात भर रोते रहे,
हम रहे बेचैन और बस तुम वहाँ सोते रहे,
आँधियाँ ग़म की यहाँ पर रात भर चलती रहीं,
और हम आँसू से अपने दाग़-ए-दिल धोते रहे ।। उर्मिला माधव..
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