ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 2 December 2019
अर्पण के लिए
बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
3.12.2014...
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