ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 27 December 2019
बदहवास को
जो काफ़िये ऑ बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं किसी बदहवास को..
उर्मिला माधव
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