ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 1 December 2019
आज़माता ही रहे
कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
2.12.2016
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment