Monday, 2 December 2019

राबिता ही न हो

हर इक ग़ज़ल की कोई इंतेहा तो होती है,
ख़ुदा करे के तेरी कोई इन्तहा ही न हो,
ये तेरा सोज़े तरन्नुम है या कमाल कोई,
दुआ रहेगी तेरा ग़म से राबिता ही न हो...
उर्मिला माधव..
2.12.016

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