तुम जीत भी जाओ तो उसे.....हार समझना, बे-मौक़ा वाह-वाह को.........बेकार समझना, शेर-ओ-सुखन के हुस्न को जीता न कोई भी, तारीफ़ की आवाज़ों को...बस प्यार समझना, उर्मिला माधव 15.10.2014...
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