ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 15 October 2019
हिज्र
रातें बहुत शुमार हुईं, ...........हिज्र की हुज़ूर,
अब दिनकी उलझनों का भला क्या जवाब हो
उर्मिला माधव
15.10.2018
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment