ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 21 October 2019
शनासाई न थी
एक तो गहरी .........शनासाई न थी,
जो भी थी वो हमने दिखलाई न थी,
हमने अपने दायरे ........कायम रखे,
हां मगर .......मंशा ये बतलाई न थी...
उर्मिला माधव
21.10.2017
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