जी हमारा उठ चुका है,हम नहीं जाते कहीं, गोकि ज़िद के बादशा हैं,ग़म नहीं खाते कहीं, भीड़ से हट के चलें ये अपने दिल की बात है, पर क़दम रफ़्तार में हैं थम नहीं जाते कहीं, उर्मिला माधव, 13.10.2018
No comments:
Post a Comment