हर कोई एक दूसरे को ..........लानतें देता रहा, ऑ वतन की शान में ....कुछ गुरबतें बोता रहा, उसकी बकरी मेरी घोड़ी,मेरी ज़्यादा,तेरी थोड़ी, अपनी ग़ैरत से भी नीचे,गिर गया......रोता रहा... उर्मिला माधव... 9.10.2015
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