Tuesday, 8 October 2019

बोता रहा

हर कोई एक दूसरे को ..........लानतें देता रहा,
ऑ वतन की शान में ....कुछ गुरबतें बोता रहा,
उसकी बकरी मेरी घोड़ी,मेरी ज़्यादा,तेरी थोड़ी,
अपनी ग़ैरत से भी नीचे,गिर गया......रोता रहा...
उर्मिला माधव...
9.10.2015

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