ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 25 November 2019
धूल करते हैं
हम जो रह-रहके भूल करते हैं,
अपनी इज्ज़त को धूल करते हैं,
इक नुमाइश ग़मों की होती हैं,
ज़िन्दगी बस फ़िज़ूल करते हैं,
उर्मिला माधव...
२६.११.२०१३..
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