ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 14 November 2019
ग़म किसीका
अजब तमाशा है आशिक़ी का,
नज़र किसीकी सनम किसीका,
ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में,
न कोई समझे है ग़म किसीका,
उर्मिला माधव
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