ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 15 November 2019
जाती हूँ मैं
जोश-ए-उल्फ़त में सू-ए-दिलबर चली जाती हूँ मैं,
कौन हूँ,क्या चाहती हूँ........कब ये बतलाती हूँ मैं,
बे-तवज्जो सा रवैय्या............बाखुदा महबूब का,
तोड़ता जाता है वो............और जोड़ती जाती हूँ मैं.....
उर्मिला माधव...
16.11.2014...
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