Tuesday, 23 December 2025

मंहगा है

सारी दुनिया चाहे जितनी मंहगी हो 
ख़ुद को मारा जाना सबसे मंहगा है..
उर्मिला माधव

Monday, 22 December 2025

Sunday, 21 December 2025

ख्वाहिशों के रंग में डूबे हुए

khwahishon ke rang main doobe huye,
jii rahe hain log sab oonghe huye,

ab kahan ho,kaise ho,kya haal hai,
biit jaayen sadiyan bin poochhe huye,

mahfilon main baithte to hain zaroor,
muskuraate hoth,dil roothe huye,

waah-waah kya baat hai,kya sher hai,
daad haazir,lab magar,sookhe huye,

aajkal ye hii masheenii taur hai,
muskuraaye,chal diye,rookhe huye,
#उर्मिलामाधव...
22.12.2015

Saturday, 20 December 2025

मगरमच्छ

साथ मगरमच्छों के मुझको रहना है,
बैर भी इनका मेरे दिल को सहना है,

जीवन भर ......मैदान नहीं छोड़ा मैने,
अब क्या छोडूं,इतना ही तो कहना है......
उर्मिला माधव..
21.12.2016

कौन पढ़ता है

कौन पढ़ता है इबारत आँख की,
मैंने प्रीफर की है तेरी मुस्कराहट....
😊
उर्मिला माधव---
21.12.2016

पहचानी नहीं जाती

ये दुनिया इस क़दर उलझी है पहचानी नहीं जाती,
अजब अहसास से लड़ती हूं हैरानी नहीं जाती, 
अज़ल से ढूंढती फिरती हूं इक बेदाग़ सा दामन,
किसी सूरत भी इस दिल की ये वीरानी नहीं जाती..
उर्मिला माधव

Wednesday, 17 December 2025

मुश्किल रही

ये मेरी मुश्किल रही के कोई दिलचस्पी नहीं,
कोई अपनी ज़िंदगी की ज़िद कभी रख्खी नहीं,
मंज़िलों की दौड़ के ख़ुद फ़ासले घटते रहे
मसअला कुछ यूं रहा, रफ़्तार भी अच्छी नहीं
उर्मिला माधव

कैसे छोड़ दूं मैं

आप ये, बतलाएं कैसे छोड़ दूं मैं,
आप से सारे मारासिम तोड़ दूं मैं ?
आप के चेहरे पे वो ज़ालिम उदासी,
जी करे दुनिया के सर को फोड़ दूं मैं..
उर्मिला माधव

Tuesday, 16 December 2025

सारी दुनिया नाप दी

ठोकरों के बल पे मैंने सारी दुनियां नाप दी,
अब सुकूँ बाक़ी रहा सो वो भी देखा जाएगा..
उर्मिला माधव..
17.12.2016

लोग जब ख़ुश हो रहे थे

लोग जब ख़ुश हो रहे थे, इस्तेमाल होते हुए,
हमने बस हैरत से देखा ये कमाल होते हुए,

कभी कभी इक ऐसा आलम होता है

कभी-कभी एक ऐसा आलम होता है
दुनियां का हर लम्हा मातम होता है,

कानों में आवाज़ कोई भी नईं जाती,
सबका मिलके चिल्लाना कम होता है
उर्मिला माधव

लीपापोती वाली

लीपापोती वाली लाइन मत लिखना,
दिलजोई का कोई साइन मत लिखना,

ठीक न लगने वाली बातें सुनते ही,
बिना बात ही उसको फ़ाइन मत लिखना
उर्मिला माधव 

अपने देखा ही कब है

आपने देखा ही कब है दिल मिरा दुखता हुआ
कुछ तो है जो हर घड़ी दिल को लगे चुभता हुआ,

क्या सलीक़ा लाएं जो कुछ कह सकें अरदास में
हर नफ़स लगता है जैसे दम कहीं रुकता हुआ
उर्मिला माधव

Sunday, 14 December 2025

मुस्तफ़ा नहीं

मासूम दिल है तेरा पर बेवफ़ा नहीं
कोई भी ज़िंदगी का इक फ़लसफ़ा नहीं,
बाहर हिसार से हैं दुनिया की सारी खुशियां,
अब कुछ है तू हमारा पर मुसतफ़ा नहीं..
उर्मिला माधव 

एक कमसिन को मुलाक़ात का मौक़ा न दिया

एक कमसिन को मुलाक़ात का मौक़ा न दिया,
तू समझदारी से समझ प्यार को धोका न दिया,
मैंने इक उम्र गुज़ारी है तज़्ब्ज़ुब में समझ,
ये जो दूरी है बहुत उम्र की दूरी है समझ,
फिर भी चाहे तो कोई वक़्त मुकम्मल करले,
क्यों ज़रूरी है किसी वहम में हलचल करले.. 
उर्मिला माधव

Saturday, 13 December 2025

ये जो दूर तक

ये जो दूर तक वीराना नज़र आता है,
न तो अपना न वेगाना नज़र आता है,
इसमें इतिहास छुपे हैं कई जन्मों के,
गौर से देखो तो अफ़साना नज़र आता है..
उर्मिला माधव..

दौड़ जाते थे

वो जो घुटनों पै दौड़ जाते थे,
अपने पैरों से चल न पाते हैं,
जो कभी सबका भार ढोते थे,
आज वो ख़ुद संभल न पाते हैं.
Urmila Madhav
Photo.. Google..

Sunday, 7 December 2025

कर न सके

मेरी नज़र का कोई एहतराम कर न सके,
अजब कमाल रहा एक काम कर न सके,

वक़ार मेरी मुहब्बत का पुर कुशादह है,
कमाल तुम हो के उठके सलाम कर न सके,
उर्मिला माधव..

Friday, 5 December 2025

विसाल करते हैं

ज़ब्त करके कमाल करते हैं,
हम कहां अर्ज़ ए हाल करते हैं,
रू ब रू लहज़ा लहज़ा होते हुए 
ग़म से ही फिर विसाल करते हैं..
उर्मिला माधव 

Tuesday, 2 December 2025

पारा पारा हो गया

जिस्म जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव...
3.12.2016

हमने तौले हैं पंख

हमने तौले है पंख मुश्किल के,
अपनी ग़ैरत कहीं न झांकी है,
ज़िन्दगी भर के,ये ताजरिबे हैं
मुफ़्त में धूल किसने फांकी है...?
उर्मिला माधव..
3.12.2016

Sunday, 30 November 2025

वक़्त का सुबूत

उसने समझ लिया था मुझे वक़्त का सुबूत,
लेकिन ये ज़िन्दगी भी कभी सच कहाँ हुई।
उर्मिला माधव

Friday, 28 November 2025

ज़ख़्म

ये ऐसे ज़ख़्म हैं जिनका कोई बदल ही नहीं,
किसीका यूं ही बिछड़ जाना फिर नहीं आना
उर्मिला माधव

Monday, 24 November 2025

बरसता है जो आंखों से

बरसता है जो आँखों से उसे सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे साजन कहेंगे हम.....
#उर्मिलामाधव,

मुक़द्दस दिल

इस मुक़द्दस दिल की तुम तस्वीर जिस दिन देख लोगे,
बस तुम्हारी हर अदा की धज्जियां उड़ जाएंगी..
उर्मिला माधव 

हम सियासत

Ham siyasat ko koii ilzaam den ya naa bhi den,
Haan magar ab zindagi aasaan bhi lagti nahin..

Is inayat ka bhala kya kijiyega dosto,
Jisme ik muflis ke ghar me daal bhi pakti nahin
Urmila Madhav

Sunday, 23 November 2025

बस एक तू है

बस एक तू है जिसे देख कर ही जिंदा हैं 
यही वजह है मुझे सिर्फ़ तू ही दिखता है..
उर्मिला माधव 

Friday, 21 November 2025

पढ़ा लिख्खा न था

तुमने उसकी शक़्ल देखी,
जिसपे लिख्खा था वजूद?
कनखियों से देख कर भी,
.........देखता कोई न था,
दिल ही दिल में मुस्कुरा के,
उसने ये सोचा के शायद,
आलिमों की भीड़ थी,
.लिख्खा-पढ़ा कोई न था,
उर्मिला माधव 

बुलाता रहा

आह में टीस भी रही शामिल,
रात दिल का क़रार जाता रहा,

चांदनी बार-बार आती रही,
कोई रह-रह के जब बुलाता रहा,
उर्मिला माधव..
20.11.2017

Thursday, 23 October 2025

चोट खाते हैं

गहरे ज़ख़्मों पे...चोट खाते हैं,
अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं,
ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा,
रात होते ही.........टूट जाते हैं,
दर्दे क़ुरबत से...रू-ब-रू होकर,
चश्मे ग़िरियाँ में...डूब जाते हैं...
उर्मिला माधव..
२४.१.२०१३

हुस्न ए शबाब

मालूम होगा आपको शक़्ल -ए-हबाब क्या है,
कांटों का साथ है तो हुस्न-ए-गुलाब क्या है,

ये ज़िन्दगी है इसमें, उजलत नहीं ज़रूरी,
मर्ग-ए-बशर ये समझे हश्र -ए-शबाब क्या है,
उर्मिला माधव 
24.10.2018

Monday, 20 October 2025

चराग़

हमारे शहर में इतने चराग़ रौशन हैं,
फिरे है तीरगी भी अपना मुंह छुपाए हुए,
इसीको देख के अब्र ए बाहर हाज़िर है,
ख़ुशी के रंग भी लाई है संग बहाए हुए...
उर्मिला माधव

Wednesday, 15 October 2025

पलते हैं

हमारे दिल जिगर में भी हज़ारों दर्द पलते हैं,
समझ लो वज़्न ये सारे हमारे साथ चलते हैं...
उर्मिला माधव 

Tuesday, 14 October 2025

फ़क़त रेशम सी गांठें थीं

गीता वर्मा
आदरणीया Urmila दीदी की एक ग़ज़ल....
इतनी प्यारी लगी कि शेयर किये बिना न रह सकी....

फ़क़त रेशम सी गांठें थीं...ज़रा सी खोल ली जातीं,
जो बातें दिल को चुभती थीं,जुबां से बोल लीं जातीं,

अगरचे खौफ़ इतना था...कोई दिल पर न लेजाये,
कहीं कहने से पहले एहतियातन...तोल ली जातीं,

मुहब्बत को सलीके से....निभाना ही नहीं था तब,
ज़रुरत क्या थी ऐसी मुश्किलें खुद मोल ली जातीं,

फरेब-ओ-मक्र में,फंसना,फंसाना शौक था जिनका,
दरीचे झाँकने को तब.........ज़मीनें गोल ली जातीं,

......उर्मिला माधव जी

Friday, 10 October 2025

उम्मीद कम थी

ख़ाब आए जब कभी भी दीद कम थी,
आप आए जब कभी उम्मीद कम थी,
बरसरे महफ़िल कभी चर्चा बहुत था,
मुस्कुराए जब कभी तनक़ीद कम थी,
उर्मिला माधव

Thursday, 9 October 2025

उसको आते हुए

जब हमने बज़्म में देखा जो उसको आते हुए,
किया है प्यार का दावा भी मुस्कराते हुए,

वफ़ा का तज़किरा जब भी किसीने छेड़ा है,
हमें भी अच्छा लगा उसकी सम्त जाते हुए,

हम अपनी बात को कहते हैं अपनी तौर महज़,
ज़माना हंसता रहा हमको जब सताते हुए,

हमारी जान कहीं अब भी उसमें पिन्हा है,
तो फिर न रंज हुआ उसका ग़म निभाते हुए,
उर्मिला माधव 

Tuesday, 7 October 2025

कभी दिल चाहता है

Kabhi dil chahta hai hum rahen tanhayi main hardum,
milega be-sabab kya gair ki beenayi main hardum,
hamaare dil k chhale kam hain kya jo gair ko dekhen.?
hamen gairat bhi roke hai bahut ruswayi se har dum.......
Urmila Madhav..

खूबियाँ कोई नहीं

राह जो चलनी है इसमें ख़ूबियाँ कोई नहीं,
रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं,

दह्र है जलता हुआ और पथ्थरों के आदमी
चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं,

और कितना आज़माना,जो हुआ वो ख़ूब है,
तुम वही हो,हम वही राज़-ए-निहां कोई नहीं,

है नया कुछ भी नहीं क्यूं इस क़दर हैरां हुए,
साथ चलने को तुम्हारे,अय मियाँ कोई नहीं,

सामने मक़्तल हुआ लो फ़िक़्र से ख़ारिज़ हुए 
इक यही रस्ता है...जिसके दरमियाँ कोई नहीं.....
उर्मिला माधव,

ज़िंदगी का वज़्न

हमारी ज़िंदगी का वज़्न ही इतना ज़ियादा है
हज़ारों कोशिशों पर भी फिसलती ही नहीं हरगिज़..
उर्मिला माधव

रब ज़माने के लिए

आपको हमने बुलाया दिल दुखाने के लिए,
वरना हम तैयार थे बस लौट जाने के लिए।।

हम ने रब का रास्ता देखा तो ये आया नज़र,
सब ज़माना रब की ख़ातिर, रब ज़माने के लिए..
उर्मिला माधव

धीरे धीरे

धीरे-धीरे हम जहां से हट गए,
ज़िन्दगी के इम्तिहां से हट गए,

जब हमें दरकार थीं तन्हाईयाँ,
बस हर इक तीरो कमां से हट गए,
उर्मिला माधव

Tuesday, 30 September 2025

जी नहीं लगता

कैसी भी बहारें हों अब जी नहीं लगता,
बेवजह नज़ारों में अब जी नहीं लगता,
कुछ रूह परीशाँ है,कुछ जिस्म परीशाँ,
पुरनूर सितारों में अब जी नहीं लगता..।।
उर्मिला माधव.....

Saturday, 20 September 2025

ज़िंदगी कब कब रही है मोतबर

ज़िन्दगी कब-कब रही है मोअतबर,
एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर

ये तो कूज़ागर की ही मर्ज़ी है बस,
जब तलक चाहे घुमाए चाक पर
उर्मिला माधव

Tuesday, 16 September 2025

एक मुद्दत से

एक मुद्दत से मेरे पीछे पड़ा है,
दर्द है के हर जगह आकर खड़ा है...

रास्ते कुछ और भी हैं दुश्मनी के,
ये बता तू किसलिए जिद पर अड़ा है?
#उर्मिलामाधव...

Tuesday, 9 September 2025

हम तेरे हिज्र से नहीं डरते

हम तेरे हिज्र से नहीं डरते,
यूँ भी डरते तो क्या नहीं मरते?

तुझ पे आहों का ही हवाला है,
हमतो इक ज़िक्र भी नहीं करते,

दिल कभी टूट कर नहीं रोया
वरना क्या आह भी नहीं भरते?

~उर्मिला माधव

Friday, 5 September 2025

सोचता कौन है

सोचता कौन है अब,रब के लिए,
मरते रहते हैं सब लक़ब के लिए,
ख़ुद की ख़ाहिश में ग़र्क़ रहते हैं,
कौन जीता है आज सब के लिए...
उर्मिला माधव

Sunday, 17 August 2025

बड़ी बेख़बर हूं

बड़ी बेखबर हूँ, हक़ीक़त बता दूं,
तुझे ज़िन्दगी अब कहाँ से सदा दूँ,

चमकती है बिजली सी ख़ामोशियों में,
अभी मैं भला कैसे घर को सजा दूँ

बहुत उम्र गुज़री अजब तीरगी में,
ये जी चाहता है कि दामन जला दूँ,

यहां मेरा अंदाज़ सब से जुदा है,
तो अंदाज तुझको नई क्या हवा दूँ,

तबीयत भी अंदर से कहने लगी है
जो हैं तीर खंजर वो सारे चला दूँ,

कभी मैंने दिल की सुनी ही कहाँ है,
जहान-ए-ज़ेहन को कहां तक दगा दूँ,
उर्मिला माधव

Wednesday, 13 August 2025

दुनिया को देखते थे

दुनिया को देखते थे कभी मुस्कुरा के हम,
दुनिया ही देखती है हमें मुस्कुरा के अब,
उर्मिला माधव

Friday, 4 July 2025

रंज कैसा होता है

मैं साज़िशों के अंधेरे में राह चलती हूं,
तुम्हें ख़बर ही नहीं, रंज कैसा होता है..
उर्मिला माधव

Thursday, 12 June 2025

शख्सियत कुछ खास अपनी

शख़्सियत कुछ ख़ास अपनी है ज़रूर,वर्ना ये किस्से कहानी किसलिए??
खोजना लाज़िम है हम में हर कुसूर,वर्ना अपनी जिंदगानी किसलिए??

हो गया अब कब तलक बल खाओगे,ऐंठ कर मरना ज़रूरी है ही क्यूँ?? 
आप भी कुछ हादसे देखो ज़रूर,इतनी ज्यादा खींचा तानी किसलिए??
उर्मिला माधव 

करबला सा हो गया

ये अजब एक वाक़या सा हो गया,
दर्द जब बढ़कर दवा सा हो गया,
अब अकेले हम, हमारे रात-दिन,
दिल हमारा,करबला सा हो गया,
#उर्मिलामाधव् ...
12.6.2015

क़ीमती कहा

सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा,
लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा,
इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !!
मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ??
उर्मिला माधव..
12.6.2017

Sunday, 8 June 2025

हटाओ चिलमन

हटाओ चिलमन इधर तो आओ मिलाओ नज़रें कि हम खड़े हैं,
अगर मुहब्बत है तुमको हमसे,तो तुम बड़े हो कि हम बड़े हैं??
क्या ये सही है दरूँ तआल्लुक़ ये सिलसिला भी दर पेश आए??
कि हर जमाल-ओ-अना से लड़के तुम्हारी दहलीज़ पै हम चढ़े हैं..
उर्मिला माधव
9.6.2013

Thursday, 5 June 2025

उम्मीदें

यौमे चारागर(doctors day)

हमारी बढ़ते हुए दर्द से उड़ें नींदें,
अगरचे फिर भी हैं कुछ चारागर से उम्मीदें,
अज़ाब ये कि यही वक़्त का तक़ाज़ा है,
वगरना रिसते हुए ज़ख़्म अपने ख़ुद सीं दें..
#उर्मिलामाधव

Wednesday, 4 June 2025

मोर की नाईं

कै मन में हूक उठ रई ऐ हवा में सोर की नाईं,
मगर चुपचाप बैठे हैं,सभा में चोर की नाईं,

Sunday, 20 April 2025

कर नहीं पाते

ये कौन लोग हैं जो सब्र कर नहीं पाते,
ख़मोश होके .कहीं से गुज़र नहीं पाते,
जो अपने हाथ में मीज़ान लेके चलते हैं,
एक सुफ़ह भी शिद्दत से भर नहीं पाते,...
उर्मिला माधव,
19.4.2017

Friday, 11 April 2025

साथ है तन्हाइयों का

साथ है तन्हाइयों का बस कोई शिकवा न डर,
फिर किन्हीं रुसवाइयों का क्यूं भला होता असर,

मुद्दतों जब आंधियों का साथ ही मिलता रहा,
किसकी हो परवाह मुझको मैं भली और मेरा घर,
उर्मिला माधव

Thursday, 10 April 2025

आंख दिखा कर

तुम बात भी करते हो हमें आंख दिखा कर
बस दिल से करो बात यहीं हम भी मिलेंगे,
उर्मिला माधव

Monday, 31 March 2025

एकतरफ़ा प्यार

एकतरफ़ा प्यार का करते भी क्या,
बे-वफ़ा के नाम पे ...मरते भी क्या?
हम ..जमा ख़ाते में रख्खे थे अबस,
मुफ़्त झूठी आह तब भरते भी क्या..
उर्मिला माधव..

ज़रूरी तो नहीं

आप हर इक ज़िन्दगी की नातवानी देखिए,
अब न तहरीरें ज़रूरी, मुंहजबानी देखिए,
उर्मिला माधव

Sunday, 30 March 2025

शेर

तूफां हैं, बवंडर हैं, शिकस्तें भी बहुत हैं 
तू देख के बतला कि भला क्या नहीं मुझमें 
तू देख ले दुनिया कि भला क्या नहीं मुझमें

Saturday, 8 March 2025

खामोशियां

Usko ye maloom tha, jana nahin hai kis jagah,

Ab dhueN ka zor hai o her taraf khamoshiyaN..
Urmila Madhav,
9.3.2018
उसको ये मालूम था, जाना नहीं है किस जगह,
अब धुंए का ज़ोर है ऑ हर तरफ़ खामोशियां..
उर्मिला माधव 

Sunday, 2 March 2025

सीखने की कोशिशें

सीखने की कोशिशें हम कर रहे हैं 
दिल ग़मों में मुस्कुरा कर चल सके
उर्मिला माधव

Saturday, 22 February 2025

मुब्तिला हो जाएगा

हर कोई बस एक ग़म में मुब्तिला हो जाएगा, 
ख़ूबियों में खामियों का सिलसिला हो जाएगा,
आपकी झूटी अदाएं, कुछ नहीं कर पाएंगी,
बेसबब ही जिंदगी से इक गिला हो जाएगा
उर्मिला माधव

Saturday, 8 February 2025

ये तेरी दुनिया

मैं ये तेरी दुनियां नहीं चाहती हूँ,
मुझे मेरी दुनियां बनाने का फ़न दे,

मिरा चश्मे गिर्या से क्यों राबिता हो,
मुझे मेरी खुशियां मनाने का फ़न दे,
उर्मिला माधव

Thursday, 6 February 2025

पीकर अपनी भांग

कुण्डलिया छंद....

क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग... 
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
7.2.2016

Monday, 3 February 2025

याद मुझको रह गए

उम्र भर वो याद मुझको रह गए,
बिन कहे जो सारी दुनियां कह गए,
रास्ते तो आज तक भी हैं वहीं,
एक वही थे जो हवा में बह गए,
उर्मिला माधव..